#जीवनसंवाद : अपनेपन से दूर!

असली चीज लोगों को अपने जैसा बनाना है उनके जैसा हो जाना नहीं! अपनेपन को बचाए रखना किसी भी संपत्ति को बचाने की तुलना में कठिन और कीमती है!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:36 AM IST
#जीवनसंवाद : अपनेपन से दूर!
अपनेपन को बचाए रखने की जो ललक यहां मिलती है, वैसी दूसरी जगह मिलनी मुश्किल है!
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 11:36 AM IST
बच्चे पैदा होने के बाद से बड़े होने तक जिस सवाल से सबसे ज्यादा गुजरते हैं वह यही होता है कि वह क्या बनना चाहते हैं? किसके जैसा बनना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं! इसमें सबसे खास बात यह होती है कि अगर वह यह बता दें कि वह किसी 'खास' की तरह बनना चाहते हैं तो उनका उत्तर संतोषजनक मान लिया जाता है. बच्चे तेज दिमाग होते हैं, बहुत जल्दी जान जाते हैं कि आपको कैसे संतुष्ट किया जा सकता है. वे यह भी जानते हैं कि आपका प्रेम, कोमलता और स्नेह हासिल करने के लिए क्या करना चाहिए.

हम सब मिलकर एक प्रकार की ऐसी भावपूर्ण स्थिति रचते हैं, जो हमें सत्य से निरंतर दूर रखती है. हम बच्चों को एक ऐसा ख्वाब रचने में सहयोग करने लगते हैं, जिसका आधार केवल भौतिक है. दुनिया जिस रास्ते चलकर सफल हो रही है उस रास्ते चलो! अपनी पगडंडी तो दूर, रास्ता बनाने के सपने बुनना भी सहज नहीं माना जाता. जिस ओर सब जा रहे हैं उस ओर चलते जाना सबसे सुरक्षित है.

रूस और दुनिया के मशहूर लेखक रसूल हमजातोव का उपन्यास 'मेरा दागिस्तान' मनुष्यता का सहज दस्तावेज है. यह मुझे अक्सर रास्ता दिखाने और फैसले लेने में मदद करता है. दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में शामिल इस अनूठी कथा का मुख्य किरदार केवल एक ही बात पर जोर देता है कि जैसे भी हो यथासंभव अपने रास्ते पर चलो! अपनेपन से प्रेम करो, अपनी मिट्टी की महक को समझो, भीतर की तपन और मिठास को जिंदा रखो. संयम को ओढ़ो, नजर से आगे देखने की ताकत पैदा करो और सबसे जरूरी नकलची बंदर बनने से बचो. ‌‌‌‌‌

Dear Zindagi
अपनेपन को बचाए रखने की जो ललक यहां मिलती है, वैसी दूसरी जगह मिलनी मुश्किल है!


अपनेपन को बचाए रखने की जो ललक यहां मिलती है, वैसी दूसरी जगह मिलनी मुश्किल है! आजकल सबसे मुश्किल बात यही हो गई है. हर किसी को लगता है कि उसे दूसरों के जैसे सुंदर, अमीर और शक्तिशाली होना है. पत्नियों को लगता है उनके पति को किसी खास की तरह सक्षम और सुंदर होना चाहिए. इसी तरह की कहानी पुरुषों की भी है. कितनी मजेदार स्थिति है कि दो लोग साथ रहते हुए अपनेपन को भूलकर एक ऐसी स्थिति की चाहत में सिकुड़ते जा रहे हैं, जो असंभव तो नहीं, लेकिन बहुत संभव भी नहीं है. हम सहज जीवन से दूर मायावी और उस दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं जो बाजार की रची हुई है. उसका मनुष्य और उसके जीवन की सुंदर बगिया से कोई सरोकार नहीं है.

हमें रहना तो बाजार के बीच ही है. हम उससे भाग नहीं सकते, लेकिन कम से कम हम यह तो कर ही सकते हैं कि हम खुद को उसके अनुसार एकदम ही न बदल लें. अपनी कोमलता मनुष्यता और अपनेपन को बचाए रखकर ही हम उस जीवन को सही मायने में जी पाएंगे, जिसकी लालसा में हम वह सबकुछ कर रहे हैं जो हम अक्सर नहीं करना चाहते हैं.

बहुत से लोग मुझे यह कहते हुए मिलते हैं कि वह शराब, सिगरेट और दूसरी ऐसी किसी चीज से जो उन्हें पसंद नहीं है, इसलिए जुड़े क्योंकि ऐसा करने से उन्हें कुछ लोगों का साथ मिलता था. ऐसा करना उनकी कामयाबी के लिए जरूरी था. मैं ऐसे लोगों का विरोध नहीं करूंगा, लेकिन यह बताना चाहूंगा कि मैं अपने जीवन में अब तक ऐसी सभी मान्यताओं को तोड़ने में सफल रहा हूं. बल्कि हुआ यह भी है कि अब तक यह सामान्य लेखक सौ से अधिक लोगों को अलग-अलग समय पर, अलग अलग शहरों में शराब और सिगरेट से दूर रखने में काफी हद तक सफल रहा है.
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असली चीज लोगों को अपने जैसा बनाना है उनके जैसा हो जाना नहीं! अपनेपन को बचाए रखना किसी भी संपत्ति को बचाने की तुलना में कठिन, लेकिन कीमती है!

इसके साथ ही यह भी कि मेरी पूरी कोशिश इस बात में होती है कि मैं अपने अनुसार अपने जीवन को देखने और संचालित करने की शक्ति बचाए रखूं. जीवन का यह सूत्र किसी दूसरे को किसी भी शर्त पर नहीं दिया जा सकता. यहां दूसरे से वही मायने हैं जिसका कल हमने जिक्र किया था. आपके लिए आपके अतिरिक्त हर कोई 'दूसरा' है.

ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com
पता : जीवन संवाद (दयाशंकर मिश्र)

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First published: July 10, 2019, 4:36 PM IST
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