#जीवनसंवाद: सपने और संकट!

‘सपने और इच्‍छा’ के अंतर को गहराई से समझना जरूरी है. हमारी इच्‍छा कुछ और हो सकती है, जबकि सपना दूसरा.

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 8:15 AM IST
दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 8:15 AM IST
हमें आपकी सघन, सतत प्रतिक्रिया मिल रही है. सबसे अधिक सवाल, जीवन में चुनाव को लेकर हैं. चुनने से अधिक जरूरी है, क्‍या नहीं करना है, इसका बोध! कौन सा ऐसा रास्‍ता है, जिसमें संकट नहीं हैं. हमारी इच्‍छा की दृढ़ता, अपनी चाहत के प्रति आस्‍था सबसे जरूरी बात है. हां, जो आप करना चाहते हैं, उसके लिए ‘बुनियादी’ गुण की अनदेखी नहीं की जा सकती. यह कुछ ऐसा है कि एक बच्‍चा अंग्रेजी अखबार में काम करना चाहता है, लेकिन उसे अंग्रेजी से परहेज है. तो इसे सपना कैसे कहा जाएगा.

‘सपने और इच्‍छा’ के अंतर को गहराई से समझना जरूरी है. हमारी इच्‍छा कुछ और हो सकती है, जबकि सपना दूसरा. अक्‍सर हम रास्‍ते चुनते समय सफलता को जरूरत से ज्‍यादा महत्‍व देते हैं. अपनी आंखों में दूसरों के सपने रखने वाले कभी सहज नहीं होते. आज से तीस बरस पहले दुनिया कुछ और थी. परिवार, समाज देश के साथ दुनिया भी बदल गई है. नौकरी के आयाम, अवसर सबकुछ बदल गए हैं.

हम सफलता की संभावना के अनुसार रास्‍तों का चयन करते हैं. पहली नजर में इसमें कोई गलती नजर नहीं आती. लेकिन अगर थोड़ी गहराई में जाएंगे, तो साफ होगा कि कुछ समय बाद ही मन भटकने लगता है. वह उस ओर दौड़ना चाहता है, जो उसका सपना था. यह बात अलग है कि आपने उस रास्‍ते जाने नहीं दिया.

Jeevan Samvaad

सपने का अंतर्मन से उपजना सबसे खास है. वह जितना भीतर से आएगा, बाहर उसका रंग उतना ही गहरा होगा. दूसरों की कामयाब ‘छाया’ में सपने को जन्‍मने से यथासंभव बचाना है! हम सब जानते हैं कि ‘छाया’ का कोई अस्तित्व नहीं है. वह जिसकी है, उसकी भी नहीं होती. तो आपके सपनों की कैसे होगी. युवा मन के बीच बढ़ता तनाव, अवसाद और आत्महत्या यह बताने के लिए पर्याप्‍त हैं कि हम कहीं न कहीं सपनों और इच्‍छा को समझने में गलती कर रहे हैं. इच्छा को सपना बना लेने भर से बात नहीं बनेगी. जो चुना है, उसके लिए हर चुनौती से लड़ना होगा.

छप्‍पर की लकड़ी की असली पहचान भादों में ही होती है. मनुष्‍य के साथ भी ऐसा ही है. चुनौतियां ही हमें बनाती हैं. जिनका जीवन स्थिर, सपाट, संघर्षरहित होता है, उनकी कितनी कहानियां आपको याद हैं. हम बच्‍चों को जो कहानियां सुनाते हैं, असल में उनके अर्थ उनकी तुलना में हमारे लिए कहीं गहरे होते हैं. अपने सभी नायकों की एक सूची बनाइए. मेरा विश्‍वास है कि उनमें से एक भी ऐसा नहीं होगा, जिसके जीवन में संकट न आया हो. चुनौती, मुश्किल समय न आया हो. क्‍योंकि इनके बिना किसी का भी नायक बनना संभव नहीं.

संघर्ष जीवन का सबसे बड़ा सौंदर्य है. जीवन की सारी सुंदरता, सार्थकता केवल और केवल संघर्ष में है.अब इस कसौटी पर अपनी इच्छा, सपने और चुने हुए रास्‍ते को कसिए. डरकर कुछ मत चुनिए. किसी को देखकर कुछ बनने का सपना मत चुनिए, क्‍योंकि उसके मन में अपने चुने के लिए कितनी कसक है, यह केवल वही जानता है. इच्‍छा, अक्‍सर आकर्षण (ग्‍लैमर) से जन्‍मती है. उसके आधार पर आपके लिए रास्‍ते की भूमिका तैयार करती है. अंतर्मन से उसका संवाद नहीं होता. दूसरी ओर अगर कोई सपना मन की गहराई, अवचेतन से जुड़ी गहन दृष्टि से आता है, तो वह कहीं अधिक दृढ़ता से हमें अपने साथ जोड़ता है. इसका चयन आकर्षण के आधार पर नहीं हुआ, इसलिए उसके लिए आप सौ जतन कर सकते हैं. इसके रास्‍ते में आने वाले संकट आपको भयभीत नहीं करते. इसलिए, सपने का चुनाव करते समय सावधान रहें. उसे दूसरों के प्रभाव से बचाएं. उसके रास्‍ते में आने वाले संकट से बचने का बस एक ही रास्‍ता है, उनसे लोहा लेना. इसके लिए हमेशा तैयार रहें.
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First published: July 10, 2019, 6:18 PM IST
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