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#जीवनसंवाद: सब कुछ 'बस' में नहीं!

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 6:24 PM IST

#जीवनसंवाद: यहां इस बात का ध्‍यान रखना जरूरी है कि हम क्षमता की बात नहीं कर रहे हैं. मनुष्‍य की क्षमता का ठीक-ठीक अंदाजा तो स्‍वयं उसके मन को भी नहीं है.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 6:24 PM IST
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हम सबकी अपनी-अपनी सीमाएं हैं. इस बात का अहसास अक्‍सर हमें नहीं होता. हम अपनी सीमा को समझे बिना अपने ऊपर दबाव बढ़ाते रहते हैं. जबकि अगर इस भाव को आत्‍मसात कर लिया जाए तो जीवन के अनेक तनाव से छुटकारा मिल सकता है. हमारे सुखी होने, दुखी रहने के बीच कोई चीज़ नहीं है. यह सब बहुत हद तक चीजों को ग्रहण करने के भाव पर निर्भर करता है. अगर समय रहते इस बात को समझ लिया जाए. मन के गहरे यह भाव बैठ जाए तो हम कहीं अधिक सुखी होते जाएंगे. अंततः हर किसी की सीमा है. हम अपनी सीमा के परे नहीं जा सकते.

यहां इस बात का ध्‍यान रखना जरूरी है कि हम क्षमता की बात नहीं कर रहे हैं.
मनुष्‍य की क्षमता का ठीक-ठीक अंदाजा तो स्‍वयं उसके मन को भी नहीं है. हममें से जो भी आगे गया है, उसके और हमारे बीच असल अंतर केवल यही रहा है कि उसने अपनी क्षमता को ठीक से पहचाना. उस आवाज पर भरोसा किया, जिसे हम अक्‍सर अनदेखा कर देते हैं.


हम यहां क्षमता की नहीं, उस मानसिक दशा/विचार की बात कर रहे हैं, जिसमें हम दुनिया की सारी चीजें हासिल करने के बारे में सोचते रहते हैं. हर ऐसे काम/जरूरत, विचार का पीछा करते रहते हैं, जिसकी ओर हमें दुनिया जाती दिखती है. इस बात को ठीक से समझने के लिए आप कस्‍तूरी और मृग का पुराना लेकिन सरल उदाहरण ले सकते हैं. अपने भीतर चीज़ों को जानने, समझने की जगह हम बाहर अधिक भटकते हैं. हमारी जीवनशैली, ‘शैली’ की जगह दूसरों की नकल अधिक बन गई है. हमें वह चाहिए जो सबके पास है. हमें उससे स्‍नेह नहीं, जिसके लिए सब हमारी ओर देखते हैं.

जिंदगी, रिश्‍तों में तनाव का सबसे बड़ा कारण यही है कि अपने मन को इच्‍छा के खुले जंगल में दौड़ने के लिए छोड़ दिया है. हम उस पर कोई लगाम नहीं चाहते. जो दिल में खयाल आया, उसके पीछे दौड़ने लगते हैं.
क्रेडिट कार्ड के बढ़ते बिल, पर्सनल लोन का बढ़ता कर्ज हमें यही सिखाता है कि जिंदगी की चाबियां, दूसरे के हाथ में सौंपने से खुशियां आपके पास नहीं टिकेंगी. वह आपके पास तभी ठहरेंगी, जब आप अपनी सीमा को समझ लेंगे.

भूटान का जिक्र जब भी आता है. उसकी अर्थव्‍यवस्‍था के लिए नहीं आता. वहां कितने साधन हैं. इसके लिए नहीं आता. बल्कि इसके लिए आता है कि वह भारत की विशाल अर्थव्‍यवस्‍था के मुकाबले बहुत छोटा होने के बाद भी कितना खुश है. भूटान जीवन की प्रसन्‍नता, आनंद को सहेजने के लिहाज से हमसे कहीं आगे है. समाज के रूप में उसने खुद को धन से अधिक स्‍नेह, आत्‍मीयता और प्रेम से लपेटे रखा है. जबकि दूसरी ओर हम बाजार के आक्रामक, भ्रामक भंवर में फंसते जा रहे हैं.
हमें जीवन में स्‍नेह और आनंद के लिए समय देना ही होगा. ऐसा किए बिना हम अपने रिश्‍तों, स्‍वयं और उन सभी को वह सुख नहीं दे पाएंगे जिनके लिए हम तरह-तरह के कष्‍ट उठाने को तैयार रहते हैं.


इसलिए, वक्‍त का एक कोना अपने लिए जरूर सहेजिए, जिसमें थोड़ा सा खयाल, संवाद अपने ही मन से किया जा सके. इससे उसे ऊर्जा, स्‍नेह मिलेगा. जिससे वह ऐसी मुश्किलों का सहजता से सामना कर सकेगा, जिनमें वह अकारण ही घबराता रहता है.

पता: दयाशंकर मिश्र (जीवन संवाद)Network18
एक्सप्रेस ट्रेड टावर, 3rd फ्लोर, A विंग
सेक्टर 16 A, फिल्म सिटी, नोएडा (यूपी)
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
(https://twitter.com/dayashankarmi )(https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

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First published: November 28, 2019, 12:14 PM IST
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