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#जीवनसंवाद: भीतर का अंधेरा!

दयाशंकर मिश्र | News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 2:57 PM IST
#जीवनसंवाद: भीतर का अंधेरा!
#जीवनसंवाद: भीतर का अंधेरा!

JeevanSamvad: जरूरत से ज्यादा संग्रह एक किस्म का मनोविकार है. संकट का सामना रोज स्वाद में डूबी तरकारी के साथ नहीं किया जा सकता. संकट है तो उसे सहना भी होगा. थोड़ा उनके लिए भी सोचिए जो कल तक आपके घर का सारा काम चुपचाप निपटाते थे. आपके घर भरने से सबसे अधिक परेशानी उनको ही हो रही है.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 2:57 PM IST
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उन्होंने हड़बड़ाहट में दरवाजा खटखटाया. कहा, जल्दी बाहर आइए. चलकर कुछ सामान ले आते हैं. कल से सबकुछ बंद हो जाएगा. मैंने कहा, क्या लेकर आइएगा. उन्होंने कहा जो भी मिलेगा खूब सारा लेना होगा, कई दिनों/महीनों की तैयारी करनी है. मैंने कहा, मुझसे नहीं होगा, हमारे पास अभी जरूरी चीजें हैं. गैर-जरूरी चीजें इकट्ठा करना, दूसरे के अधिकार पर डाका डालने जैसा है. कुछ उग्रता और उपहास के साथ घर के बाहर खूंटी पर टंगी नेमप्लेट 'डियर ज़िंदगी' की तरफ देखते हुए कहा, ऐसी बातों का कोई अर्थ नहीं. यह जीवन-मरण का प्रश्न है. मैंने क्षमा चाहते हुए कहा, कोई बात नहीं आप ले आइए.

वह लगभग दौड़ते हुए गए. मध्यम वर्ग की अधूरी अटूट चाहतों की तरह, पास की दुकान पर टूट पड़े. वहां उनके जैसे और भी लोग थे. कुछ देर बाद वो विजयी भाव से खूब सारा सामान लादे घर लौटे. कहा, अब कोई चिंता नहीं. बाज़ार में मौजूद किराने की दुकानें ऐसे ही लोगों से खाली होनी शुरू हो गई हैं. जब सबकुछ लगभग बंद है, दुकानों में इतनी जल्दी सामान कैसे आएगा!

हमारे घरों में काम करने वाले घरेलू सहायक इस तरह घर नहीं भरते. वह रोज थोड़ी-थोड़ी चीजें लेकर आते हैं. हम अपने संकट ऐसे ही बुनते हैं. जरूरत से ज्यादा संग्रह एक किस्म का मनोविकार है. यह आप पर है कि आप जीवन को कैसे देखते हैं. संकट का सामना रोज स्वाद में डूबी तरकारी के साथ नहीं किया जा सकता. संकट है तो उसे सहना भी होगा. थोड़ा उनके लिए भी सोचिए, जो कल तक आपके घर का सारा काम चुपचाप निपटाते थे. आपके घर भरने से सबसे अधिक परेशानी उनको ही हो रही है.




उनके खातों में कुछ पैसे दीजिए. अगर संभव है तो पता लगाइए उनके पास राशन कार्ड है कि नहीं. ऐसे जरूरी कागज हैं कि नहीं, जिनसे सरकारी मदद मिलती है. अगर नहीं, जो भी आपके पास है उसे थोड़ा-थोड़ा सबको दीजिए. हमने अपने कुछ मित्रों के साथ तय किया है कि घर पर पड़े रहने से, बीमारी से बचने मोटापे से दूर रहने के लिए, और सबसे बढ़कर शरीर के सेहतमंद बने रहने के लिए कम भोजन, उपवास योग और ध्यान की ओर जाने का इससे बेहतर समय नहीं है. जब तक दूसरों को कुछ दीजिएगा नहीं, प्रकृति से मांगिएगा का कैसे!



बांटने का इससे बेहतर समय नहीं है. ईर्ष्या, मनमुटाव और मन के बैर/ मैल धो डालिए. मैंने ऐसी सभी चीज़ों/ बातों को हमेशा के लिए भूल जाने का अभ्यास शुरू कर दिया है, जिन्हें मैं अपने साथ अपने साथ रखी जाने वाली अंतिम चार बातों में नहीं रख सकता. ऐसी चार बातें इस प्रकार हैं,

एक- वह स्मृति जिसमें दूसरे के प्रति नाराजगी/घृणा हो.
दूसरा- दूसरे के दिए विचार से मुक्ति. जीवन संकट से बचा रहा, तो शेष जीवन अपने विचार से जीना.
तीसरा- नकली इच्छा से मुक्ति. हम स्वतंत्र पैदा हुए हैं. अपना सारा जीवन ऐसी इच्छा/लालसा के इर्द-गिर्द बिता देते हैं, जो वास्तव में नकली और दूसरों की थोपी हैं.
चौथी और सबसे महत्वपूर्ण- बच्चों की ओर से/ उनके कुछ होने में अपने योगदान के प्रति मुक्ति.

हमारा लालन-पालन और परवरिश कुछ ऐसी है कि हम बच्चों के नाम पर वह सब करते रहते हैं जो संभव है उनकी गैर-जरूरी चिंता न होने पर न करें. यह सोचते हुए कि इससे बच्चे का भविष्य बनता है. हम अनेक भारी बोझ मन पर लादे रहते हैं. यह प्रकृति के विरुद्ध है.

बच्चे का भविष्य स्वयं बच्चा है. वह जो भी है, अब उसे अपना निर्णय स्वयं करने देना है. इससे आपका जीवन बहुत हल्का और स्वतंत्र होता है. बच्चे को भूलकर भी कठोरता से उन रास्तों पर चलने के लिए विवश मत कीजिए जिसे आप सही समझते हैं. वह कभी वहां नहीं जाएगा, संभव है डर और भय से कुछ दूर चल भी ले. लेकिन मन तो दुखी ही रहेगा. इसलिए, उसके निर्णय में सहभागी बनिए, लेकिन उससे जुड़ी अपनी इच्छा के मायाजाल से मुक्त हो जाइए. जीवन बहुत हल्का हो जाएगा.


मन को इच्छा के कंधे पर लादे, दौड़ते ही रहते हैं, अवसर मिला है तो भीतर की ओर जाइए. वहां बहुत अंधेरा है, कुछ दीये जलाइए. इच्छा, लालसा और संग्रह के बोझ से मुक्त मन ही हिंसा से दूर हो सकते हैं. अहिंसा और प्रेम के बीच गहरा अंतर्संबंध है. इसकी ओर बढ़िए. कोरोना से उपजा यह संकट मनुष्य को बदलने आ रहा है. समाज और हमारे रिश्ते बदलने जा रहे हैं. ऐसे में आप मानसिक रूप जितने अधिक स्वस्थ रहेंगे. जीवन उतना ही सरस और प्रेमपूर्ण होगा.

दयाशंकर मिश्र
ईमेल : dayashankarmishra2015@gmail.com अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें:
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First published: March 26, 2020, 2:57 PM IST
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