झारखंड की जेलों में बंद 52 फीसदी कैदी हैं युवा, इन्हें नशे की लत ने बनाया अपराधी

झारखंड की जेलों में बंद 52 फीसदी अपराधी युवा हैं.
झारखंड की जेलों में बंद 52 फीसदी अपराधी युवा हैं.

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो(NCRB) के रिपोर्ट की मानें तो झारखंड (Jharkhand) की जेलों में बंद 52 फीसदी कैदी युवा (Youth) है. इनकी उम्र 18 साल से लेकर 30 साल के बीच है. ये युवा नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराध (Crime) करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 7:55 PM IST
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रांची. झारखंड (Jharkhand) के युवाओं को नशे (Intoxication) की तल और अपराध (Crime) की प्रवत्ति बर्बाद कर रही है. युवा अपनी जवानी अपराध करने और नशे की खोज में लगा रहे हैं. युवाओं (Youth) में नशे की लत और अपराध एक काकटेल की तरह काम कर रहा है, जो झारखंड के युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रहा है. ये हम नहीं NCRB की रिपोर्ट कह रही है. रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि झारखंड के 52% अपराधी युवा हैं और उनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है. शुरुआती दौर में अपने नशे की लत को पूरा करने के लिए ये युवा छोटे-मोटे अपराध करते हैं, लेकिन समय के साथ जैसी ही ये और बड़े होते हैं तो निडर हो जाते हैं, जिसके बाद वो बड़े अपराध करने लगते हैं.

इसके बाद जेल की दहलीज तक पहुंचते हैं, लेकिन इस काल कोठरी में बंद अपराधी उनको अपने जाल में फंसाकर गुनाह के उस दलदल में पहुंचा देते हैं, जहां से इनका निकलना संभव नहीं हो पाता और पूरी जिंदगी जेल और अदालत के चक्कर काटते बीत जाती है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी द्वारा जारी रांची सहित राज्यभर के आंकड़ों पर गौर करें तो जेलों में बंद कैदियों में आधे से ज्यादा कैदी युवा हैं, जिनकी उम्र 18 साल से लेकर 30 साल तक की है. रांची के सिटी एसपी सौरभ ने बताया कि इन दिनों में ज्यादातर अपराध की घटना को अंजाम देने वाले आरोपी युवा हैं और नशे की लत को पूरा करने के लिए वो अपराध की दुनिया मे कदम रख देते हैं.

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एनसीआरबी के आंकड़े चौकाने वाले
एनसीआरबी द्वारा जारी 2019 के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो झारखंड में 52.3 प्रतिशत से ज्यादा अंडर ट्रायल अपराधी हैं, जो 18 से 30 साल के हैं. 39.5 फीसदी 30 से 50 साल की उम्र के हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में झारखंड में अंडर ट्रायल अपरधियों की संख्या 12759  थी. इनमें 18-30 साल के बीच के युवाओं की संख्या 6672 यानी 52.3 प्रतिशत थी.

दूसरे नंबर पर 30 से 50 साल के लोग आते हैं. इनकी संख्या 5045 यानी 39.5 प्रतिशत रही है. 50 साल से ऊपर की उम्र के अंडर ट्रायल आरोपियों की संख्या 1041 यानी 8.2 फीसदी थी. वहीं झारखंड में सजायाफ्ता कैदियों की संख्या 5871 है, जिसमें 18-30 साल के 1870 कैदी यानी 31.9 प्रतिशत
30-50 साल के 2905 कैदी जबकि 50 साल से ऊपर के 18.7 प्रतिशत यानी 1096 कैदी की संख्या है.
झारखंड के 12073 लोगों का अंडर ट्रायल चल रहा है, जबकि झारखंड के रहने वाले 5579 कैदी सजायाफ्ता हैं. अन्य राज्यों के 684 लोगों का अंडर ट्रायल चल रहा हैं, जबकि अन्य राज्य के रहने वाले 288 कैदी सजायाफ्ता हैं.

युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रशासन गंभीर
राज्य भर के अलग-अलग जेलों में बंद 48 सजायाफ्ता कैदी पीजी डिग्री धारी हैं, जबकि 106 सजायाफ्ता पीजी डिग्री धारी कैदी अंडर ट्रायल  हैं. वहीं 107 कैदी टेक्निकल डिग्री वाले भी अपराध की घटना में लिप्त हैं. रांची सिटी एसपी सौरभ ने बताया कि युवा वर्ग को मुख्य धारा में जोड़ने को लेकर पुलिस और जेल प्रशासन भी गम्भीर रहता है जो उनकी हर संभव मदद करने की कोशिश करता है.
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