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इन खूबसूरत पक्षियों को मारना चाहता है कोई?

इन खूबसूरत पक्षियों को मारना चाहता है कोई?

फरवरी तक यहां प्रजनन सम्पन्न कर गर्मियों से पहले ही नए मेहमानों के साथ विदा हो जाते हैं.  लेकिन बेरोक टोक शिकार के कारण दिन प्रतिदिन मेहमान पक्षियों की संख्या घटती जा रही है.

फरवरी तक यहां प्रजनन सम्पन्न कर गर्मियों से पहले ही नए मेहमानों के साथ विदा हो जाते हैं. लेकिन बेरोक टोक शिकार के कारण दिन प्रतिदिन मेहमान पक्षियों की संख्या घटती जा रही है.

गोड्डा जिला में प्रवासी पक्षियों का शिकार धड़ल्ले से होता है.

गोड्डा जिला में प्रवासी पक्षियों का शिकार धड़ल्ले से होता है. इसका खुलासा तब हुआ जब एक सप्ताह पूर्व पत्थरगामा में एक साथ 8 प्रवासी पक्षियों का शव मिले. माना जाता है कि ये पक्षी एलोपोटा ग्रीन पिजन हैं जो दुर्लभ प्रजाति के हैं. मृत पक्षियों को देखने के बाद वन विभाग हरकत में आया.
गोड्डा जिला में प्रवासी पक्षियों का शिकार धड़ल्ले से होता है. इसका खुलासा तब हुआ जब एक सप्ताह पूर्व पत्थरगामा में एक साथ 8 प्रवासी पक्षियों का शव मिले. माना जाता है कि ये पक्षी एलोपोटा ग्रीन पिजन हैं जो दुर्लभ प्रजाति के हैं. मृत पक्षियों को देखने के बाद वन विभाग हरकत में आया.


जिला मुख्यालय में ब्लाक मैदान के समीप एक गिरोह द्वारा पक्षियों के शिकार के उद्देश्य से लगाए गए जाल को वन विभाग ने जब्त कर लिया. दरअसल स्थानीय संतोष कुमार झा ने सोमवार शाम को ही कुछ लोगों को पक्षियों को पकड़ने के लिए ब्लॉक मैदान में जाल लगाए देखा. पहले उन्होंने अपने स्तर पर उन्हें ऐसा नहीं करने का अनुरोध किया. पर बात नहीं मानने पर उन्होंने वन विभाग को इसकी सूचना दे दी.
जिला मुख्यालय में ब्लाक मैदान के समीप एक गिरोह द्वारा पक्षियों के शिकार के उद्देश्य से लगाए गए जाल को वन विभाग ने जब्त कर लिया. दरअसल स्थानीय संतोष कुमार झा ने सोमवार शाम को ही कुछ लोगों को पक्षियों को पकड़ने के लिए ब्लॉक मैदान में जाल लगाए देखा. पहले उन्होंने अपने स्तर पर उन्हें ऐसा नहीं करने का अनुरोध किया. पर बात नहीं मानने पर उन्होंने वन विभाग को इसकी सूचना दे दी.


इसके बाद वन विभाग ने जाल को जब्त कर लिया. हालांकि वन कर्मियों के पहुंचने के पहले ही सभी शिकारी भागने में सफल रहे.
इसके बाद वन विभाग ने जाल को जब्त कर लिया. हालांकि वन कर्मियों के पहुंचने के पहले ही सभी शिकारी भागने में सफल रहे.


गौरतलब है कि सामान्य कबूतर से कहीं अधिक आकर्षक नजर आने वाले एलोपोटा ग्रीन पिजन दिसंबर की शुरुआत मे गोड्डा और आसपास के इलाके में पहुंच जाते हैं.
गौरतलब है कि सामान्य कबूतर से कहीं अधिक आकर्षक नजर आने वाले एलोपोटा ग्रीन पिजन दिसंबर की शुरुआत मे गोड्डा और आसपास के इलाके में पहुंच जाते हैं.


फरवरी तक यहां प्रजनन सम्पन्न कर गर्मियों से पहले ही नए मेहमानों के साथ विदा हो जाते हैं. लेकिन बेरोक टोक शिकार के कारण दिन प्रतिदिन मेहमान पक्षियों की संख्या घटती जा रही है.
फरवरी तक यहां प्रजनन सम्पन्न कर गर्मियों से पहले ही नए मेहमानों के साथ विदा हो जाते हैं. लेकिन बेरोक टोक शिकार के कारण दिन प्रतिदिन मेहमान पक्षियों की संख्या घटती जा रही है.


 

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