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पूरी जांच पड़ताल के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएंगे बच्चे

Gyanendu Jaypuriar | News18 Jharkhand
Updated: July 13, 2018, 1:55 PM IST
पूरी जांच पड़ताल के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएंगे बच्चे
बोकारो में गुरुवार को एलेप्पी एक्सप्रेस से उतारे गए 87 बच्चों को लेकर जांच पड़ताल जारी.

बोकारो के डीसी मृत्युंजय वर्णवाल ने कहा कि संदेह के कारण सभी बच्चों को जामताड़ा पुलिस मुख्यालय के सुपुर्द किया जा रहा है ताकि जांच कर आगे कोई निर्णय लिया जा सके.

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सीआईडी रांची की सूचना पर बोकारो पुलिस, रेलवे जीआरपी औऱ आरपीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को एलेप्पी एक्सप्रेस से 87 बच्चों को उतारा था औऱ सभी बच्चों की जिम्मेदारी बाल कल्याण समिति बोकारो को दी गई थी. शुक्रवार को बच्चों से एक बार फिर डीसी मृत्युंजय वर्णवाल, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह समेत अन्य दंडाधिकारियों ने पूछताछ की. बच्चों से शुक्रवार को हुई पूछताछ के बाद जो बातें सामने आ रही है उससे ऐसा लगता है कि डीसी समेत समिति के सदस्य बच्चों की बातों से संतुष्ट नहीं हैं. इस बीच घटना की सूचना के बाद कुछ बच्चों के परिजन पहुंचे हैं. बच्चों के परिजनों से कहा गया है कि वे आधार कार्ड व शपथ पत्र लेकर आएं और बच्चों को ले जाने की प्रकिया करें.

बताते चलें कि जो बच्चे हैं उनकी उम्र 6 से 16 साल के बीच की है. इनमें से 77 बच्चे जामताड़ा के, 3 बच्चे देवघर के, 1 बच्चा धनबाद का और 3 बच्चे गिरिडीह के हैं. गुरुवार को धनबाद एलेप्पी एक्सप्रेस में सवार कर इन 87 बच्चों को बेहतर तालीम देने के नाम पर तेलंगाना के खम्मम जिला स्थित रोटरी नगर के जामिया तुल अरविया मदरसा ले जाया जा रहा था. इन बच्चों के साथ 6 मौलवी भी थे. रांची सीआईडी को सूचना मिली थी कि बच्चों को मानव तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है.

गुरुवार से अब तक हुई जांच पड़ताल के बाद अब सीडब्लूसी जामताड़ा के सदस्यों के आने के बाद ही बच्चों को उनके परिजनों को सुपुर्द किए जाने की बात कही जा रही है. जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह भी मानते हैं कि गलत तरीके से बच्चों को ले जाया जा रहा था. उनका कहना है कि बच्चों के पास कोई पहचान पत्र नहीं था और न ही कोई सरकारी चिट्ठी. वहीं डीसी मृत्युंजय वर्णवाल ने कहा कि संदेह के कारण सभी बच्चों को जामताड़ा पुलिस मुख्यालय के सुपुर्द किया जा रहा है ताकि जांच कर आगे कोई निर्णय लिया जा सके.

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First published: July 13, 2018, 1:55 PM IST
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