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झारखंड की इस लुप्त होती कला को नई पहचान दिलाने वाले बिनोद महतो 'रसलीन' को मिलेगा 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा सम्मान'

बिनोद महतो पद्मश्री मुकुंद नायक के शिष्य हैं.

बिनोद महतो पद्मश्री मुकुंद नायक के शिष्य हैं.

खोरठा के धुरंधर बिनोद कुमार महतो 'रसलीन' को "उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा सम्मान" से सम्मानित किया जाएगा. उन्हें ये सम् ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- मृत्युंजय कुमार

बोकारो. झारखण्ड में पहली बार लोक कला के क्षेत्र में खोरठा के युवा धुरंधर बिनोद कुमार महतो ‘रसलीन’ को “उस्ताद बिस्मिल्लाह  खान युवा सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा. उन्हें ये सम्मान झारखंड की पारंपरिक लोक नृत्य घोड़ा नाच के लिए दिया जाएगा. घोड़ा नृत्य शैली को झारखंड में पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले विनोद महतो का चयन संगीत नाटक आदमी पुरस्कार- 2021 के लिए हुआ है.

विनोद महतो बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र सिंहपुर के रहने वाले हैं. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार अकादमी पुरस्कार है. संगीत नाटक अकादमी द्वारा 40 वर्ष से कम आयु के उत्कृष्ट कलाकारों को ये दिया जाता है. संगीत, नृत्य और रंगमंच के क्षेत्र में विशिष्ट प्रतिभाओं को ये सम्मान दिया जाता है. इसके लिए प्रत्येक साल 32 कलाकारों का चयन किया जाता है. उन्हें राष्ट्रपति के हाथों एक समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है.

विनोद महतो ने बताया कि उन्हें मिलने वाला ये सम्मान यहां के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा, क्योंकि डीजे की धुन में नाचते युवाओं को देखकर उन्हें काफी दर्द होता है. झारखंड की पारंपरिक पर लुप्त होती घोड़ा नाच को एक नई पहचान मिलेगी. घोड़ा नाच पूर्व में शादी से लेकर अन्य कार्यक्रमों में किया जाता था. लेकिन वर्तमान समय में वह विलुप्त हो रहा है.

विनोद के मुताबिक झारखंड की संस्कृति में आखड़ा संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्थान है. आखड़ा लोक संस्कृति की परंपरा में गांव के सभी लोग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. गांव के आखड़ा को लोक कला संस्कृति का प्रशिक्षण केन्द्र भी माना जाता है. इसी आखड़ा संस्कृति से अपनी लोक कला, संगीत और नृत्य का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त होता है.

बिनोद सिंहपुर निवासी नेपाल महतो व मालती देवी के पुत्र हैं. उनके दादा मनु राम महतो व बनू राम महतो नगाड़ा के सुप्रसिद्ध वादक थे. उन्हीं से प्रेरित होकर विनोद महतो ने क्लास संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया. 2008 में पद्मश्री मुकुंद नायक की ‘कुंजबन’ संस्था से जुड़े और लोक संगीत-नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के उपरांत खोरठांचल की घोड़ा लोक नृत्य शैली की ओर रुझान हुआ. यह नृत्य शैली झारखंड में विलुप्त होने के कगार पर है. अपने गुरु मुकुंद नायक के सानिध्य  में इस नृत्य शैली पर गहन कार्य किया.

Tags: Bokaro news, Jharkhand news

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