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जिंदगी की जीतः कोयला खान में फंसे 4 मजदूर खुद रेंगते हुए बाहर निकले, कहा- मां काली का चमत्कार

जिंदगी की जीतः कोयला खान में फंसे 4 मजदूर खुद रेंगते हुए बाहर निकले, कहा- मां काली का चमत्कार

बोकारो में कोल ब्लॉक की चाल धंसने से फंसे चारों मजदूर सकुशल वापस लौटे.

बोकारो में कोल ब्लॉक की चाल धंसने से फंसे चारों मजदूर सकुशल वापस लौटे.

Bokaro Coal Block News: बीसीसीएल के बंद पड़े कोल ब्लॉक में 26 नवंबर को अवैध खनन के दौरान चाल धंंसने से खदान में फंसे 4 मजदूरों ने हिम्मत और हौसले का परिचय देते हुए उस जगह से अपनी जिंदगी को जीत कर ले आए, जहां मौत तय थी. करीब चार दिन बाद यह मजदूरों ने रोशनी और सरसराती हवा के सहारे रास्ता खोजा, रास्ता बनाया और रेंगते हुए खदान से बाहर निकल आए. उनकी सकुशल वापसी के बाद परिवार के लोग व प्रशासन ने राहत की सांस ली है.

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    रिपोर्ट- मृत्युंजय कुमार

    बोकारो. कहा जाता है कि अगर हिम्मत और हौसला हो तो कुदरत या कहें भगवान भी उसकी मदद करते हैं. यहां भी जाको राखे साइयां मार सके ना कोई वाली कहावत चरितार्थ हुई. झारखंड के बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड स्थित पर्वलपुर कोल ब्लॉक में अवैध खनन के दौरान चाल धंसने से चार मजदूर फंस गए थे. किसी को उम्मीद नहीं थी कि चारों की जान बचेगी. सबने मान लिया था कि खदान में फंसे यह लोग तड़प, तड़प कर दुनिया को अलविदा कह चुके होंगे, लेकिन, चौथे दिन कई घंटों बाद चमत्कार हुुआ और चारों खदान से बाहर निकल गए. सबसे खास बात यह कि बगैर किसी की मदद के यह हुआ. इन मजदूरों ने खुद रोशनी और हवा की सरसराहट को महसूस कर रास्ता बनाया और बाहर निकले.

    मजदूरों के घरवाले और गांव वाले इसी मां काली का चमत्कार मान रहे हैं. जैसे ही लोगों को चारों के जिंदा बच निकलने की सूचना मिली, वैसे ही तिलाटांड गांव में मजमा लग गया. स्थानीय विधायक और झारखंड प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष अमर बाउरी, जेएमएम जिला उपाध्यक्ष विजय रजवार भी गांव पहुंचे. चारों के बच निकलने की खुशी में गांव में पूजा-पाठ का दौर चल रहा है.

    26 नवंबर की रात से खदान में फंसे थे मजदूर

    बता दें कि 26 नवंबर, शुक्रवार को आमलाबाद ओपी क्षेत्र में सीसीएल के पर्वतपुर कोल ब्लॉक में अवैध खनन के दौरान चाल धंसने के कारण ये सभी चारों मजदूर फंस गए थे. दबे चारों लोग लक्ष्मण रजवार, रावण रजवार, भरत सिंह तथा अनादी सिंह ने स्वयं रास्ता बनाकर बाहर निकल आए. सभी स्थानीय तिलाटांड़ के निवासी हैं. उनकी सकुशल वापसी के बाद परिवार के लोग व प्रशासन ने राहत की सांस ली है. पूरे गांव मे जश्न का माहौल है तथा गांव में मां काली की पूजा की तैयारी चल रही है.जैसे ही इन चारों मजदूरों के घर पहुंचने की सूचना मिली तो धीरे- धीरे पूरा गांव इकट्ठा हो गया. वहीं, मेडिकल टीम भी मौके पर मौजूद थी. खदान से बाहर आए लोगों का मेडिकल जांच करने के लिए चारों लोगों को जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने इन्हें ले जाने से मना कर दिया जिसके बाद चारों की जांच कर मेडिकल टीम बैरंग लौट गई.

    बोकारो कोल ब्लॉक की चाल धंसने से फंसे सभी चारों मजदूरों की सकुशल वापसी के बाद लोगों व प्रशासन ने राहत की सांस ली है.

    बीसीसीएल और एनडीआरएम ने भी बचाने का किया था प्रयास

    बता दें कि सभी कोयला निकालने के लिए सुरंग के रास्ते अंदर गए थे. अचानक से चाल धंस गया. चाल धंसने की सूचना जमीन पर पड़ी दरार से मिली. हालांकि शुरू में पुलिस इस बात से इंकार करती रही, लेकिन जब फंसे हुए लोगों के स्वजन सामने आए तो प्रशासन भी सक्रिय हुआ. पूरे मामले में खास बात यह रही कि सुरंग की स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम ने हाथ खड़ा कर दिये थे. वहीं, एनडीआरएफ की टीम ने पहुंचकर केवल रविवार को मुआयना किया.सोमवार से सुरंग के अंदर प्रवेश करने की बात थी. लेकिन, रविवार देर रात तब तक चारों ने अपने हिम्मत व बुद्धि का परिचय देते हुए जान बचा ली.

    खदान के पानी के सहारे गुजार दिए तीन दिन

    खदान में फंसे मजदूरों ने तीन दिन खदान का पानी पीकर रास्ता तलाशने का काम किया. इन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और लगे रहे. सामने खड़ी मौत को मात देकर बाहर निकल गए. सुरंग में फंसे भरत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 9 बजे वे लोग कोयला निकालने के लिए अंदर गए कि अचानक से एक बजे चाल धंस गई. रास्ता बंद होता देख हमारी हिम्मत टूट गई और शाम तक बैठे रहे. बाहर से किसी की आवाज भी नहीं मिल रही थी. अपने पास जो भी पानी था उसका उपयोग करते हुए रात भर शांत रहे. हादसे के बाद प्रवेश किये रास्ता को साफ करने का प्रयास करने लगे.त्कार बता रहे हैं. कहीं दंड प्रणाम हो रहा है तो वहीं, गांव में मां काली पूजा की तैयारी है.

    बोकारो कोल ब्लॉक की चाल धंसने से फंसे चारों मजदूरों की सकुशल वापसी के बाद लोग इसे मां काली का चमत्कार बता रहे हैं. कहीं दंड प्रणाम हो रहा है तो वहीं, गांव में मां काली पूजा की तैयारी है.

    काफी मेहनत के बाद भी सुरंग का रास्ता साफ नहीं हुआ. इसके बाद चारों लोगों ने यह निर्णय लिया कि यहां चाल धंस गई है, सो दूसरे रास्ते की तलाश की जाय. इसके बाद वैकल्पिक रास्ते को साफ करने के लिए सभी लग गए. रविवार की सुबह से हिम्मत जुटाकर एक-एक कर रास्ते को साफ करने लगे. अंतत: रविवार की रात से रास्ता मिलने का आसार नजर आने लगा तो हिम्मत बढ़ी. जान बचाने की जिद के कारण भूखे-प्यासे पूरी रात मेहनत के बाद लगभग दो बजे रात में सुरंग के रास्ते पर पहुंचे और तीन बजे बाहर निकलकर घर पहुंच गए. उनका कहना था कि हमें यह पता चल चुका था कि प्रशासन के स्तर से किसी भी स्तर से प्रयास कर हमें बाहर नहीं निकाला जा सकता है.

    टॉर्च की रोशनी में गुजारे चार दिन

    सुरंग से निकले अनादी सिंह ने बताया कि जीवन की टूटती डोर के बीच हिम्मत नहीं हारे. यही कारण है कि आज अपने परिवार के साथ हैं. हादसा होने के बाद हमलोगों ने यह निर्णय लिया कि अपने पास चार टॉर्च है, उसमें से एक का ही उपयोग करना है ताकि बैट्री बरकरार रहे. जब तक रोशनी है तब तक काम हो सकेगा. इसके लिए एक-एक कर रास्ते को खोजने का काम किया. बिना किसी संसाधन के कहीं हाथों से दूसरे रास्ते में पड़े पत्थरों को साफ करते गए और यह दैवी चमत्कार ही था कि हम लोग धीरे धीरे कर बाहर निकल गए. जैसे ही हम लोग बाहर निकलने से पहले पहुंचे तो ठंडी हवा धीरे-धीरे सुरंग में आने लगी तब हमें यह लगा कि अब हम बाहर आ चुके हैं.

    Tags: Bokaro news, Jharkhand news

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