बोकारो: अपहरण के बाद मासूम की हत्या मामले में अदालत ने सुनाया फैसला, तीन को मिली फांसी की सजा
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बोकारो: अपहरण के बाद मासूम की हत्या मामले में अदालत ने सुनाया फैसला, तीन को मिली फांसी की सजा
11 साल के मासूम अंकित कुमार की हत्या के मामले में तीन को मिली फांसी की सजा (फाइल फोटो)

बोकारो के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन सिंह की अदालत ने गुरुवार को 11 वर्षीय मासूम अंकित कुमार उर्फ सुधाशु के अपहरण और उसकी हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने उसकी हत्या के अपराध में दोषी करार दिए गए तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई.

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बोकारो. झारखंड के बोकारो के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन सिंह की अदालत ने गुरुवार को 11 वर्षीय मासूम अंकित कुमार उर्फ सुधाशु के अपहरण और उसकी हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने उसकी हत्या के अपराध में दोषी करार दिए गए तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस मानते हुए यह अहम फैसला सुनाया. साथ ही अदालत ने तीनों दोषियों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई है. जुर्माने की राशि पीड़ित के पिता को देने का आदेश दिया गया है.

अदालत ने केस को माना 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस'

मामले की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 11 साल के मासूम बच्चे अंकित उर्फ सुधांशु की निर्मम हत्या को अदालत ने काफी संगीन मामला माना और तीनों को सजा-ए-मौत मुकर्रर की गई. बोकारो के सेक्टर-4 थाना क्षेत्र में रहने वाले मृत बालक के रिश्तेदार एवं डीआईजी कार्यालय में बतौर रीडर कार्यरत अमलेश सिंह ने इस बावत प्राथमिकी दर्ज कराई थी.  सेक्टर-4 थाने की इस प्राथमिकी के आधार पर सत्रवाद संख्या- 230/14 में अदालत ने सुनवाई की.



26 नवंबर 2013 का है मामला



गौरतलब है कि अंकित 26 नवंबर 2013 को ट्यूशन पढ़ने जा रहा था, उसी दौरान विवेक कुमार, संजय कुमार रजक और संजीव कुमार ने उसे अगवा कर लिया था. सुधांशु ट्यूशन के बाद जब घर नहीं लौट सका तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार दिसंबर  2013 को विवेक नामक युवक को पकड़ा गया. पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. आरोपी विवेक ने बताया कि अपने साथियों की मदद से उसने अंकित को अगवा किया था. विवेक के बयान और निशानदेही पर पुलिस ने संजय रजक, संजीव कुमार और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया, जब जांच-पड़ताल की गई तो पूरे मामले का खुलासा हो गया. आरोपियों ने उस दौरान अंकित की हत्या करने की  बात भी स्वीकारी. पुलिस ने बताया कि छात्र सेक्टर- 4सी में अपने मौसा एवं डीआईजी कार्यालय के रीडर कमलेश सिंह के घर रहकर पढ़ाई किया करता था.

अदालत ने तीनों दोषियों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की भी सुनाई सजा (सांकेतिक तस्वीर)
अदालत ने तीनों दोषियों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपए जुर्माने की भी सुनाई सजा (सांकेतिक तस्वीर)


 20 लाख रुपये की फिरौती के लिए किया था मासूम का अपहरण

मामले के अपर लोक अभियोजक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव के अनुसार अपराधकर्मियों ने 20 लाख रुपये की फिरौती के लिए अंकित का अपहरण किया था. घर वालों से बातचीत के बाद पांच लाख रुपये पर सहमति बनी. परिजनों ने मसौढ़ी के तोरगना में जाकर पांच लाख रुपये अपहरणकर्ताओं को दे दी थी, लेकिन आरोपियों ने बच्चे को वापस नहीं किया. फिरौती की रकम लेकर कार से बोकारो आने के दौरान पुलिस के डर से आरोपियों ने अंकित की गला दबाकर हत्या कर दी. पुलिस ने 7 दिसंबर को हजारीबाग जिला के गोरहर थाना क्षेत्र के कलकतिया घाटी में एक झाड़ी से अंकित का कंकाल, स्कूल बैग और जूते बरामद किया. बता दें कि कोर्ट ने बीते मंगलवार को तीनों आरोपियों को इस मामले में दोषी करार दिया था.

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