झारखंड: विरोधियों के तंज से परेशान मैट्रिक पास शिक्षा मंत्री ने इंटर में लिया एडमिशन, BJP ने कही ये बात
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झारखंड: विरोधियों के तंज से परेशान मैट्रिक पास शिक्षा मंत्री ने इंटर में लिया एडमिशन, BJP ने कही ये बात
शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कॉलेज पहुंचकर खुद अपना एडमिशन कराया

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो (Jagarnath Mahto) ने सोमवार को बोकारो के देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय में एडमिशन (Admission) कराया. उन्होंने आर्ट्स के छात्र के रूप में 11वीं में दाखिला लिया है.

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बोकारो. झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो (Jagarnath Mahto) ने अब इंटर (Inter) की पढ़ाई पूरी करने की ठानी है. इसके लिए उन्होंने एडमिशन भी ले लिया है. दरअसल विरोधी उन पर दसवीं पास शिक्षा मंत्री कहकर तंज कसते थे. इससे नाराज मंत्री ने विरोधियों को जवाब देने के लिए आगे की पढ़ाई करने का फैसला लिया है.

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने सोमवार को बोकारो के नावाडीह स्थित देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय में एडमिशन कराया. उन्होंने आर्ट्स के छात्र के रूप में 11वीं में दाखिला लिया है. मंत्री ने खुद कॉलेज पहुंच कर अपना एडमिशन कराया. इस दौरान कॉलेज की छात्र- छात्राएं ये जानकर चकित रह गईं कि अब मंत्री जी उनके साथ शिक्षा ग्रहण करेंगे.

छात्रा आरती कुमारी और प्रियंका कौशल ने कहा कि यह सुनकर अच्छा लगा कि उनके साथ मंत्री भी क्लास में बैठेंगे. और पढ़ाई करेंगे.



ये स्टंट तो नहीं- बीजेपी
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि हमारे आरोप के चलते अगर मंत्री उच्च शिक्षा ले रहे हैं, तो ये खुशी की बात है. उन्होंने कहा कि मंत्री नई शिक्षा नीति का विरोध कर रहे हैं. लेकिन पहले उन्हें इसके बारे में जान लेना चाहिए. हालांकि ये भी देखना होगा कि मंत्री वाकई आगे की शिक्षा ग्रहण करने को लेकर संजीदा हैं या फिर मीडिया में बने रहने के लिए ये एक नया स्टंट है.

मैट्रिक के बाद छोड़ दी पढ़ाई
शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने बताया कि उन्होंने 1995 में मैट्रिक की परीक्षा सेकेंड डिवीजन से पास की थी. उसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. लेकिन जब राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने शपथ ली तो विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए उन्हें दसवीं पास शिक्षा मंत्री कहा.

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को 25 साल बाद पढ़ाई की याद आई है.
शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को 25 साल बाद पढ़ाई की याद आई है.


पढ़ाई की कोई उम्र नहीं- मंत्री
बतौर मंत्री उन्होंने विरोधियों के तंज को चुनौती के रूप में लेकर इंटर की पढ़ाई पूरा करने का फैसला लिया है. वह खुद भी पढ़ेंगे और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का काम भी करेंगे. शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती है. वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए पढ़ाई को भी मुकाम तक पहुंचाएंगे.
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