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बीजेपी को कमल निशान देने वाले झारखंड के पूर्व मंत्री समरेश सिंह का निधन, 5 बार रहे विधायक

झारखंड अलग राज्य बनने के बाद समरेश सिंह प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बने थे. (फाइल फोटो)

झारखंड अलग राज्य बनने के बाद समरेश सिंह प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बने थे. (फाइल फोटो)

बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्य थे. मुंबई में 1980 में आयोजित भाजपा के प्रथम अधिवेशन में कमल ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- मृत्युंजय कुमार

बोकारो. झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री समरेश सिंह का आज उनके सेक्टर- चार स्थित आवास में निधन हो गया. वे 5 बार विधायक रहे. समरेश सिंह  बीजेपी और जेवीएम से विधायक चुने गये थे. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद वे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बने. समरेश सिंह के निधन से बोकारो में शोक की लहर दौड़ गई. समरेश सिंह लगातार बीमार चल रहे थे. दो दिन पूर्व ही रांची से इलाज कराकर बोकारो लौटे थे.

समरेश सिंह के निधन की खबर सुनकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो, चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी, बोकारो विधायक बिरंची नारायण सहित अन्य लोगों ने दुख प्रकट किया. समरेश सिंह अपने राजनीतिक जीवन में कई नेताओं को विधायक बनाने का काम किया. लेकिन इनमें से दो प्रमुख नेता जो समरेश सिंह को अपना राजनीतिक गुरु मानते आए, उनमें बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो और चंदनकियारी के विधायक अमर कुमार बाउरी प्रमुख हैं.

समरेश सिंह को अविभाजित बिहार के समय से दादा के नाम से जाना जाता था. समरेश सिंह की इच्छा धनबाद लोकसभा से सांसद बनने की थी, लेकिन वह कभी पूरी नहीं हो पाई. उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट से भी धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन महज कुछ वोटों के अंतर से चुनाव हार गए.

बीजेपी के संस्थापक सदस्य थे समरेश सिंह 

बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्य थे. मुंबई में 1980 में आयोजित भाजपा के प्रथम अधिवेशन में कमल निशान का चिह्न रखने का सुझाव इन्हीं का था, जिसे केंद्रीय नेताओं ने मंजूरी दी थी. दरअसल समरेश को 1977 के चुनाव में कमल निशान पर ही जीत मिली थी. बाद में समरेश भाजपा से 1985 व 1990 में बोकारो से विधायक निर्वाचित हुए. इससे पहले 1985 में समरेश सिंह ने इंदर सिंह नामधारी के साथ मिलकर भाजपा में विद्रोह कर 13 विधायकों के साथ संपूर्ण क्रांति दल का गठन किया था. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद संपूर्ण क्रांति दल का विलय भाजपा में कर दिया गया.

1995 में चुनाव हारे

वर्ष 1995 में समरेश सिंह ने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद वर्ष 2000 का चुनाव उन्होंने झारखंड वनांचल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा. फिर 2009 में झाविमो के टिकट पर विधायक बने. बाद में भाजपा में शामिल हो गये, लेकिन 2014 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर वह निर्दलीय लड़े थे. जिसमें उन्हें हार मिली थी.

Tags: Bokaro news, Jharkhand news

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