क्रिकेट खेलते हुए गंवाई आंख, IAS बन कानूनी लड़ाई लड़ी, ऐसी है बोकारो के नए DC राजेश सिंह की कहानी
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क्रिकेट खेलते हुए गंवाई आंख, IAS बन कानूनी लड़ाई लड़ी, ऐसी है बोकारो के नए DC राजेश सिंह की कहानी
आईएएस राजेश सिंह को बोकारो का डीसी बनाया गया है.

IAS अफसर राजेश सिंह को झारखंड के बोकारो जिले का नया उपायुक्त (Deputy Commissioner) बनाया गया है. उनकी नियुक्ति इसलिए खास है, क्योंकि पहली बार किसी दृष्टिबाधित IAS को जिले का डीसी बनाया गया है.

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बोकारो. झारखंड सरकार (Government of Jharkhand) ने मंगलवार को राज्य के 16 आईएएस (IAS) अफसरों के तबादलों की सूची जारी कर दी. इस लिस्ट में एक नाम ने सबको चौंकाया, वह था IAS राजेश सिंह का. जी हां, देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित नौकरी को पाने की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले राजेश सिंह को बोकारो जिले का नया उपायुक्त (Deputy Commissioner) बनाया गया है. उनकी नियुक्ति इसलिए खास है, क्योंकि पहली बार किसी दृष्टिबाधित IAS को जिले का डीसी बनाया गया है.

मूल रूप से बिहार के पटना स्थित धनरुआ के रहने वाले राजेश सिंह के आईएएस बनने के बाद भी तमाम अड़चनें आई थी. लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्होंने सफलता हासिल की. बोकारो का डीसी बनने से पहले वे उच्च शिक्षा में विशेष सचिव थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दृष्टिबाधित राजेश सिंह ने साल 2007 में यूपीएससी की परीक्षा पास की. राजेश देश के ऐसे पहले दृष्टिबाधित थे, जो IAS बने. हालांकि उनकी नियुक्ति में कई पेंच आए, लेकिन हक की लड़ाई में उनकी जीत हुई. 2011 में उनकी नियुक्ति हो पाई. अब उन्हें बोकारो का डीसी बनाया गया है.

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क्रिकेट खेलते हुए चली गई आंखों  की रोशनी
राजेश सिंह को बचपन में ही क्रिकेट खेलने का शौक था. बताते हैं कि क्रिकेट खेलते समय ही ही एक हादसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई. इसके बाद उनका संघर्ष जारी रहा और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) से पढ़ाई की. फिर 2007 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बने, लेकिन दृष्टिबाधित होने के कारण उनकी नियुक्ति का विरोध किया गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की बेटी डॉ. उपिंदर कौर से मुलाकात के बाद राजेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

सुप्रीम कोर्ट में उनके मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और अभिजीत पटनायक की बेंच ने की. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार कोर्ट ने सरकार को राजेश सिंह की नियुक्ति करने का निर्देश दिया. साथ ही अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि IAS के लिए दृष्टि नहीं, बल्कि दृष्टिकोण की जरूरत होती है. राजेश सिंह के इसी दृष्टिकोण ने आज उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है.
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