अपना शहर चुनें

States

झारखंड: कोरोना संकट में मजदूरी कर घर चला रहे हैं अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर

फुटबॉलर संतोष कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर कई मैच खेले हैं
फुटबॉलर संतोष कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर कई मैच खेले हैं

बोकारो जिला फुटबॉल संघ की ओर से संतोष कुमार को नौकरी (Job) देने के लिए 10 साल पहले राज्य सरकार (Jharkhand Government) को आवेदन दिया गया था, लेकिन अबतक उन्हें नौकरी नहीं दी गई.

  • Share this:
बोकारो. अंतरराष्ट्रीय जूनियर फुटबॉल चैंपियनशिप में भारत और राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में झारखंड का कई बार प्रतिनिधित्व करने वाले बोकारो (Bokaro) के खिलाड़ी (Footballer) संतोष कुमार आज बोकारो स्टील प्लांट (Bokaro Steel Plan) में ठेका मजदूरी करने को विवश हैं. राज्य सरकार के द्वारा आजतक खेल नीति नहीं बना पाने के कारण संतोष जैसे खिलाड़ी आज खेल को छोड़ रोजी-रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. राज्य में प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है. यहां के खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में न केवल राज्य बल्कि देश का नाम भी ऊंचा किया है. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण कई खिलाड़ियों की जिंदगी में उदासी छाई हुई है.

लॉकडाउन में चौपट हो गया धंधा, तो कर रहे मजदूरी

बोकारो के सेक्टर-9 के शिव शक्ति कॉलानी में रहने वाले फुटबॉलर संतोष कुमार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि पिता के मौत के बाद परिवार चलाने के लिए उन्हें खेल छोड़कर वीडियो रिकॉर्डिंग का व्यवसाय शुरू करना पड़ा. लेकिन इसमें भी वो सफल नहीं हो पाए, क्योंकि कोरोना लॉकडाउन के चलते उनका धंधा चौपट हो गया. दुकानबंद रहने के कारण घर चलाने में सारी जमा पूंजी खत्म हो गई. अब संतोष परिवार चलाने के लिए बोकारो स्टील प्लांट में ठेका मजदूरी करने को विवश हैं.



10 साल पहले आवेदन दिया लेकिन अबतक नहीं मिली नौकरी 
बोकारो जिला फुटबॉल संघ की ओर से संतोष को नियोजन देने की मांग को लेकर वर्ष 2000 में तत्कालीन राज्य सरकार को आवेदन भी दिया गया था, लेकिन सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई मदद उन्हें नहीं मिली. उनकी प्रतिभा को इसी से समझ सकते हैं कि संतोष ने दस साल की उम्र से ही फुटबॉल खेलना शुरू किया और पांच साल के अदर इंटर फिर राज्य स्तरीय खेल में टीम का हिस्सा बने गये. वर्ष 1995 में सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल चैंपियनशिप की विजेता टीम का सदस्य रहे. वर्ष 1997 में इजरायल में हुई प्रतियोगिता में भारतीय टीम का हिस्सा रहे. जिसमें भारत तीसरे स्थान पर रहा था. 1999-2000 में केरल में संतोष ट्राफी में भाग लेने वाली बिहार टीम के सदस्य के रूप में शामिल हुए.

सरकार का रवैया उदासीन 

उन जैसे खिलाड़ियों के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर संतोष कुमार कहते हैं कि ये दुख की बात है कि खिलाड़ियों के प्रति सरकार ध्यान नहीं दे रही है. इसलिए उन जैसे खिलाड़ियों को खेल छोड़कर मजदूरी करना पड़ रहा है.

जिला ओलपिंक संघ के वरीय उपाध्यक्ष रोश्वर सिंह कहते हैं कि सराकर को खिलाड़ियों को सम्मान के साथ नियोजन देना चाहिए, ताकि खिलाड़ी अन्य परेशानियों में न फंसकर खेल में बेहतर कर पाएं.

पूर्व राष्ट्रीय एथलेटिक्स खिलाड़ी अनिल कुमार कहते हैं कि कोई भी सरकार खिलाड़ियों के प्रति गंभीर नहीं है. इसी का नतीजा है कि खिलाड़ी आज सब्जी बेचने और मजदूरी करने को विवश हैं. ऐसे खिलाड़ियो को सम्मान दिलाने के लिए वो संघर्ष जारी रखेंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज