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झारखंड के इस मशहूर देवी मंदिर में वर्जित है महिलाओं का प्रवेश, जानें वजह

झारखंड के बोकारो जिला स्थित एक मंदिर में महिलाओं को एंट्री नहीं मिलती है

झारखंड के बोकारो जिला स्थित एक मंदिर में महिलाओं को एंट्री नहीं मिलती है

Bokaro Mangal Chandi Temple: झारखंड के बोकारो में स्थित देवी मां के इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बोकारो के इस मंदिर में महिलाएं 100 फीट दूर से ही मां मंगलचंडी की पूजा करती हैं.
महिला श्रद्धालुओं का प्रसाद व अन्य पूजन सामग्री पुजारी आकर उस सीमा क्षेत्र से ही ले जाते हैं
यह मंदिर बोकारो मुख्यालय से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर है

रिपोर्ट- मृत्युंजय कुमार

बोकारो. आम तौर पर किसी भी मंदिर में श्रद्धालुओं के तौर पर महिलाओं की भीड़ अधिक देखने को मिलती है, लेकिन हम आज आपको बता रहे हैं एक ऐसी मंदिर की कहानी जहां महिलाओं का प्रवेश तक वर्जित है. ये मंदिर झारखंड के बोकारो में है. बोकारो के इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया गया है. शारदीय नवरात्र में जहां पूरा देश एक ओर नारी शक्ति की पूजा कर रहा है तो वहीं दूसरी और इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया जाना अध्यात्म को चुनौती देते हुए एक अबुझ पहेली बनी हुई है.

यह मंदिर बोकारो मुख्यालय से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर कसमार प्रखंड के टांगटोना पंचायत के कुसमाटाड़ गांव में है. दरअसल देवी मां के इस मंदिर में महिला श्रद्धालु दूर से भी जो मन्नत मांगती हैं, वो पूरा तो हो जाता है लेकिन मंदिर में घुसकर पूजा करने की उनकी भी इच्छा होती है. जो मान्यता है और जो घटनायें घट चुकी हैं उसके कारण डर लगता है क्योंकि जिस मंदिर में पहले महिला घुसी थीं, वहां अब पूजा नहीं होती है. भगवान ने सपने में पुजारी को स्थान परिवर्तन करने को कहा और कहा कि यहां महिलाएं प्रवेश न करें, तब से बगल में ही एक और मंदिर बना दिया गया और वहीं पूजा अर्चना होने लगी है. चुकि मां को सिन्दूर बहुत पसन्द है इसलिए सिन्दूर से मां पूरी तरह से ढकी हुई रहती हैं.

इस मंदिर में महिलाएं 100 फीट दूर से ही मां मंगलचंडी की पूजा करती हैं. इतनी ही दूरी पर अगरबत्ती जलाने के लिये भी सीमांकन किया हुआ है, जहां से महिलाओं को एक कदम भी आगे नहीं जाना होता है. महिला श्रद्धालुओं के प्रसाद व अन्य पूजन सामग्री पुजारी आकर उस सीमा से ले जाते हैं. ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं को अछूत मानकर या पुरूष वर्चस्व के कारण मंदिर के बाहर दूर से पूजा करना पड़ता है बल्कि इसके पीछे अंधविश्वास की 100 वर्ष पुरानी मान्यता और महिलाओं में अनहोनी होने का डर है जिसके मुताबिक ही महिलाएं दूर से मां दुर्गा की उपासना व पूजा अर्चना करती हैं.

मान्यता है कि जब कभी भी कोई महिला मंदिर के अंदर जा कर पूजा करती हैं, तो किसी अनहोनी का शिकार हो जाती हैं. गांव की सैंकड़ों महिलाएं इसकी गवाह हैं और महिलाओं के साथ-साथ पुजारी भी कहते हैं कि एक बार एक महिला ने मंदिर के अंन्दर घुसकर पूजा करने की कोशिश कि और बली दिये हुए बकरे का प्रसाद रूपी मांस खाया तो वो पागल हो गई. इस घटना के बाद पुजारी को देवी मंगलचन्डी का सपना आया कि आज के बाद से महिलाएं मेरे मंदिर में न आयें, साथ ही जिस मंदिर में महिला गई थी उसका स्थान परिवर्तन किया जाये और नये स्थान में मुझे स्थापित किया जाये.

तब से आज तक मंदिर में न तो महिलाओं का प्रवेश है और न ही वो मंदिर के अंदर जाकर पूजा अर्चना कर सकती हैं. यहां बलि के रूप में चढ़ाये गए बकरे के सिर को जमीन मे गाड़ दिया जाता है और सीमांकित गये क्षेत्र में ही श्रद्धालु बकरे का भोज भात खा लेते हैं. जिस पुराने मंदिर में महिला घुसी थी उसी के पास एक नये मंदिर का निर्माण किया गया और अब वहीं पूजा अर्चना होने लगी.

Tags: Bokaro news, Jharkhand news

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