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आइए चलें, बोकारो के गोमुख का दर्शन करने, सालों भर जहां से निकलती रहती है मीठी जलधारा

आइए चलें, बोकारो के गोमुख का दर्शन करने, सालों भर जहां से निकलती रहती है मीठी जलधारा

पहाड़ी की पगडंडियों से गोमुख मंदिर धाम के पास के मीठे जल के सोते से पानी लाने जातीं महिलाएं.

पहाड़ी की पगडंडियों से गोमुख मंदिर धाम के पास के मीठे जल के सोते से पानी लाने जातीं महिलाएं.

Gomukh in Jharkhand: डुमरी विधानसभा में एक जगह है नावाडीह. इसी नवाडीह में भवानी गांव है. यहीं पत्थरों के भीतर से मीठे पानी का एक सोता सालों भर बहता रहता है. इस गांव के कुछ लोगों ने इस जगह पर मंदिर का निर्माण कर इसका नामकरण किया - गोमुख गंगा धाम. इस मीठे जल के सोते के मुहाने पर गाय के मुख की आकृति बनवा दी गई है. इस निर्माण के बाद ऐसा लगता है कि यह मीठी जलधारा गोमुख से निकल रही हो.

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मृत्युंजय कुमार

बोकारो. झारखंड की धरती रत्नगर्भा तो है ही, यहां प्रकृति की नेमत भी बरसती है. आज आपको झारखंड के एक ऐसे इलाके में लिए चलते हैं, जहां घने जंगल भी हैं, पहाड़ भी हैं, पास बहती हुई नदी भी है और वहीं है मीठे जल का एक सोता, जो सालों भर बहता रहता है. कभी न सूखने वाले इस पानी के सोते का स्रोत कहां है, इसका पता आज तक कोई नहीं लगा पाया. आसपास के लोग इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं. यह लोकेशन बोकारो जिला मुख्यालय से महज 50 किलोमीटर दूर डुमरी विधानसभा क्षेत्र में है.

डुमरी विधानसभा में एक जगह है नावाडीह. इसी नवाडीह में भवानी गांव है. यहीं पत्थरों के भीतर से मीठे पानी का एक सोता सालों भर बहता रहता है. इस मीठे जलधारा के आसपास की प्राकृतिक छटा मन मोह लेती है. इस क्षेत्र में रहनेवाले ग्रामीण बूढ़े, बुजुर्ग, जवान सभी इसे पौराणिक मीठे जल का सोता कहते हैं. वे बताते हैं कि पूर्वजों के जमाने से यह निरंतर बह रहा है.

इस गांव के कुछ लोगों ने इस जगह पर मंदिर का निर्माण कर इसका नामकरण किया – गोमुख गंगा धाम. इस मीठे जल के सोते के मुहाने पर गाय के मुख की आकृति बनवा दी गई है. इस निर्माण के बाद ऐसा लगता है कि यह मीठी जलधारा गोमुख से निकल रही हो. यहां एक मंदिर का भी निर्माण करा दिया गया है. इस मंदिर के सामने से नीचे कलकल करती एक नदी भी बह रही है. इस नदी को यहां के ग्राणीण अंबाझरना कहते हैं. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी से लगभग 50-60 फीट नीचे पगडंडियों के सहारे उतरना पड़ता है. फिर कलकल बहती नदी के पार मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.

Gomukh Ganga dham

मंदिर गोमुख गंगा धाम (ऊपर) और मीठे जलधारा के पास बनवाई गई गऊ की आकृति.

इस इलाके में रहने वाले मूरत महतो कहते हैं कि वह अपने जन्म से ही इस मीठी जलधारा को देख रहे हैं. उनका मानना है कि इस मीठे पानी को पीकर सभी रोग दूर हो जाते हैं. यह पानी विटामिन और मिनरल से भरपूर है. लोग पूजा-पाठ के अनुष्ठानों में इस पवित्र जल का इस्तेमाल करते हैं. वह इसकी तुलना गंगाजल से करते हैं.

वहीं, गांव के ही हीरालाल महतो और अनिल कुमार महतो का कहना है कि इससे ज्यादा शुद्ध जल तो कोई हो ही नहीं सकता. इस पानी की कई खासियत है. एक खासियत तो यह भी है कि गर्मी के दिनों में पानी ठंडा और ठंडा के दिन में गर्म पानी निकलता है. लोग ठंड के मौसम में इस गर्म पानी से खूब नहाते हैं. कई लोग इस जलस्रोत का पता लगाने आए, लेकिन आज तक इसका पता नहीं चल पाया है. सरकार अगर चाहे तो यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है.

इसी इलाके में रहनेवाली मीना देवी कहती हैं कि यह मीठे जल के स्रोत का उपयोग हर कोई करता है. इसका इस्तेमाल खाना बनाने से लेकर पीने और पूजा-पाठ के लिए भी किया जाता है. हालांकि यहां तक आने के लिए पहाड़ों की पगडंडियों से होते हुए आना पड़ता है. क्योंकि रास्ता नहीं है. लेकिन इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. इससे लोगों की आस्था जुड़ी है. यहां मकर संक्रांति का आयोजन बड़े ही धूमधाम से होता है.

Tags: Bokaro news, Free Tourism, Jharkhand news

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