सड़क पर चल रहे अंधे शख्स को देखकर मिली प्रेरणा, 11वीं के छात्र ने बनाया ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक'

छात्र को इस काम में स्कूल के शिक्षकों का भी सहयोग मिला.

छात्र को इस काम में स्कूल के शिक्षकों का भी सहयोग मिला.

Bokaro News: कोरोना काल में दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए भी इसमें व्यवस्था की गई है. 2 गज की दूरी पर किसी वस्तु या व्यक्ति के होने पर छड़ी में घंटी बजने लगती है.

  • Share this:

रिपोर्ट- मृत्युंजय कुमार

बोकारो. बोकारो के एमजीएम हायर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ने वाले ग्यारहवीं के छात्र हार्दिक वटाविया ने दृष्टि निःशक्त लोगों के लिए एक ‘स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक’ का अविष्कार किया है. इसमें स्टिक को पकड़े व्यक्ति के सामने किसी भी प्रकार के व्यवधान उत्पन्न होने पर अलार्म बज उठेगा. इससे व्यक्ति सावधान हो जाएगा और सतर्कता से आगे बढ़ सकेगा. इस छड़ी में अल्ट्रासॉनिक सेंसर, स्विच, बज़र, बैट्री व ऑर्डिनो बोर्ड लगा हुआ है. इसमें ऑन-ऑफ सुविधा के लिए स्विच भी लगाया जा सकता है.

कोरोना काल में दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए भी इसमें व्यवस्था की गई है. 2 गज की दूरी पर किसी वस्तु या व्यक्ति के होने पर ही घंटी बजने लगती है. जब भी कोई वस्तु सेंसर के 2 गज की सीमा क्षेत्र में आती है तो यह सक्रिय हो जाती है. इसकी सूचना बोर्ड तक पहुंचती है. बोर्ड से संदेश बज़र तक पहुंचते ही बज़र बजने लगता है.

हार्दिक को यह छड़ी बनाने की प्रेरणा सड़क पर जा रहे एक नेत्रहीन व्यक्ति को देख कर मिली. हार्दिक ने देखा कि वह व्यक्ति अपनी छड़ी के सहारे बहुत मुश्किल से चल पा रहा था. यह देख कर उसने इस संबंध में कुछ करने की सोची. उसने अपने विद्यालय के प्राचार्य फादर तेजीसी वर्गीज एवं विज्ञान के शिक्षक गिबिन थॉमस को इसके बारे में बताया. उन्हीं के मार्गदर्शन में विभिन्न यंत्रों-उपयंत्रों का चयन, उनको विद्युत परिपथ में सही तरीके से लगाना व प्रोग्राम फीड करने का काम किया,
प्राचार्य फादर रेजीसी वर्गीज ने बताया कि छात्रों को विज्ञान के सिद्धांत प्रयोगों के जरिए ‘अटल टिंकरिंग लैब’ में समझाए जाते हैं और हार्दिक ने शिक्षक की देख-रेख में यह छड़ी बनाई है. उन्होंने बताया की कोरोना काल के बाद नगर के दृष्टिबाधित लोगों के सामने इसे प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि वो इसका प्रयोग कर सकें. उन्हें स्टिक उपलब्ध कराने में शिक्षक व हार्दिक सहयोग प्रदान करेंगे. उन्होंने इसको पेटेंट कराने की बात पर शिक्षकों से चल रहे विमर्श की भी बात कही.

शिक्षक थॉमस ने बताया कि यह स्मार्ट छड़ी तरंग, परावर्तन व ध्वनि के सिद्धांत पर काम करती है. और इसे बनाने में लगभग दो हजार रुपए का खर्च आया है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज