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मां के इस मंदिर में नहीं जाती हैं माएं, दो सौ साल से है प्रवेश वर्जित

News18 Jharkhand
Updated: August 8, 2018, 1:51 PM IST
मां के इस मंदिर में नहीं जाती हैं माएं, दो सौ साल से है प्रवेश वर्जित
मंदिर के बाहर पूजा करतीं महिलाएं

यहां सिर्फ पुरूषों को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत है, जबकि महिलाएं मंदिर से सौ फीट की दूरी पर चिह्नित स्थान पर खड़ी रह कर पूजा-अर्चना करती हैं.

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सनातन धर्म में नारी रूप को शक्ति का प्रतिक माना गया है और इस रूप में उनकी आराधना भी होती है. लेकिन बोकारो में मां के एक मंदिर में नारी का प्रवेश वर्जित है. ये सिलसिला पिछले दो सौ सालों से जारी है. कसमार प्रखंड में स्थित मंगल चंडी मां के मंदिर में आज भी महिलाएं प्रवेश नहीं करती हैं.

यहां सिर्फ पुरूषों को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत है, जबकि महिलाएं मंदिर से सौ फीट की दूरी पर चिह्नित स्थान पर खड़ी रह कर पूजा-अर्चना करती हैं. लेकिन इसको लेकर महिला श्रद्धालुओं को कोई आपत्ति नहीं है.

महिला श्रद्धालुओं का कहना है कि दूर से भी जो मन्नते वे मांगती हैं, मां उसे पूरा करती हैं. वर्षों से चल रही इस पंरपरा को तोड़ने की हिम्मत कोई नहीं करता. एक बार प्रयास किया गया, तो उस शख्स के साथ कई अनहोनी हुई.

ऐसा कहा जाता है कि मां के इस मंदिर में वर्षों पूर्व एक महिला ने यहां के एक पत्थर को कुएं में फेंक दिया. रात में पुजारी को इसका सपना आया, जिसके बाद उस पत्थर को कुएं से निकाला गया. मंदिर में स्थापित कर उसका पूजा-पाठ शुरू हुआ. दूसरी ओर महिलाओं के मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया. तब से ये परंपरा आज तक चली आ रही है.

मंदिर के पुजारी के मुताबिक ये परंपरा दो सौ वर्षों से चली आ रही है. यहां आने वाले भक्तों की हर मुराद मां पूरी करती हैं. न सिर्फ कसमार बल्कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं. स्थानीय लोग भी मानते है कि वर्षो से चली आ रही इस पंरपरा को तोड़ने की हिम्मत कोई नहीं करता है. मंगलवार को यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

 

(ज्ञानेंदू की रिपोर्ट)
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First published: August 8, 2018, 1:50 PM IST
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