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मिसाल: जज, डीसी और एसपी ने कुपोषित बच्चों को लिया गोद

मिसाल: जज, डीसी और एसपी ने कुपोषित बच्चों को लिया गोद

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

लोहरदगा जिलेे को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने मुहिम चलाकर 260 गंभीर कुपोषित बच्चों का चयन किया है. दो फेज में कुपोषित बच्चों का चयन गांव-गांव, घर-घर के स्तर पर किया गया है. पहले फेज में 188 और दूसरे फेज में 72 बच्चों का चयन जिला प्रशासन ने किया है.

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    लोहरदगा जिलेे को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने मुहिम चलाकर 260 गंभीर कुपोषित बच्चों का चयन किया है. दो फेज में कुपोषित बच्चों का चयन गांव-गांव, घर-घर के स्तर पर किया गया है. पहले फेज में 188 और दूसरे फेज में 72 बच्चों का चयन जिला प्रशासन ने किया है.

    पहले चरण में चयनित बच्चें लगभग स्वस्थ्य हो चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में चयनित बच्चों की स्थितियां सुधर रही हैं.

    राष्ट्रीय पोषण मिशन की महानिदेशक मृदुला सिन्हा ने बताया कि लोहरदगा जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह, डीसी भुवनेश प्रताप सिंह, एसपी कार्तिक एस ने भी गोद लिया.

    सदर प्रखंड के सिंहपुर और ऐनेखास गांव के शिल्पी कुमारी, वर्षा कुमारी, रिया कुमारी, अनीष लकड़ा और अनीषा लकड़ा गंभीर कुपोषण के शिकार थे, लेकिन अब ये सामान्य बच्चों के साथ खेलने कूदने के अलावा आंगनबाड़ी केन्द्र में पढ़ाई करने का काम कर रहे है.

    छह माह पहले ये बच्चें गंभीर कुपोषित होने के कारण सामान्य बच्चों की तरह जिन्दगी नहीं गुजार पा रहे थे. मां भी अपने बच्चों के हालत को देखकर चिंतिंत थी, लेकिन आर्थिक समस्या इन्हें इनके हालात से लड़ने का बल प्रदान नहीं कर रही थी.. जिला प्रशासन की मुहिम ने इनके बच्चों को एक नई जिंदगी प्रदान की है. अब बच्चों के साथ साथ परिजनों में भी खुशी की लहर देखी जा रही है. कुपोषित बच्चे की मां निभा देवी और सविता उरांव ने बताया कि वे प्रशासन की इस मदद से काफी खुश हैं.

    राष्ट्रीय पोषण मिशन की महानिदेशक मृदुला सिन्हा ने बताया कि लोहरदगा जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह, डीसी भुवनेश प्रताप सिंह, एसपी कार्तिक एस ने भी गोद लिया.

    अतिकुपोषित बच्चों के संरक्षण का दायित्व इन्होंने भली भॉति पूरा करने का काम किया. अब ये बच्चें स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में आ चुके है. इसके अलावा जिला से लेकर प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारियों ने भी कुपोषित बच्चों के संरक्षण का दायित्व लेने का काम किया है. यही नहीं जिले के शिक्षक, मीडियाकर्मियों, एनजीओ और सरकारी कर्मियों ने भी पीली रेखा में आने वाले बच्चों के संरक्षण का दायित्व अपने कंधे पर संभाला है, जिसकी प्रशंसा राष्ट्रीय पोषण मिशन की महानिदेशक ने जिला विजिट के दौरान मुक्त कंठ से की.

    Tags: Jharkhand news, Lohardaga news

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