लड्डू खिलाकर पुरुषों को शराबी बनने से बचा रही हैं महिलाएं

झारखंड में महिलाएं लड्डू खिलाकर पुरुषों को शराबी बनने से बचा रही हैं. चतरा जिले की ये महिलाएं महुआ के लड्डू बनाकर बेच रही हैं ताकि शराब बनाने के लिए बाजार में महुआ मिले ही नहीं.

News18 Jharkhand
Updated: July 22, 2019, 2:42 PM IST
लड्डू खिलाकर पुरुषों को शराबी बनने से बचा रही हैं महिलाएं
महुआ की कच्ची शराब नष्ट करती पुलिस ( फाइल फोटो)
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Updated: July 22, 2019, 2:42 PM IST
नशे की लत छुड़ाने के लिए झारखंड के चतरा जिले में महिलाओं ने एक अनोखी पहल की है. वे अब लड्डू खिलाकर पुरुषों को शराबी बनने से बचा रही हैं. गिद्धौर प्रखंड में दो गांवों की महिलाओं ने महुआ की खरीद शुरू कर दी है. इसका मकसद है कि शराब बनाने के लिए बाजार में महुआ ही नहीं मिले. महुआ खरीद कर ये महिलाएं उससे लड्डू बना रही हैं. ये लड्डू बाजार में पांच रुपए प्रति पीस के हिसाब से बेच रही हैं. इन महिलाओं का कहना है कि जब जिले में महुआ नहीं मिलेगा तो इसकी शराब नहीं बन पाएगी और परिवार वाले शराबी नहीं बनेंगे. इस तरह पैसे बचेंगे और जीवनस्तर सुधरेगा. ग्रामीणों को नशामुक्त बनाने का यह अभियान मसूरिया और गिद्धौर गांव की 60 महिलाओं ने शुरू किया है. ये सभी आठ महिला समूहों से जुड़ी हैं. ये अब दूसरे गांव की महिलाओं को भी महुआ से लड्डू बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. इसके लिए अखंड ज्योति नाम की स्वयंसेवी संस्था ने नाबार्ड के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है. अब महिलाओं का समूह जिला में होनेवाली महुआ की उपज खरीद लेगा.

झारखंड में महुआ की अवैध शराब को पुलिस अक्सर नष्ट करने में जुटी रहती है (फाइल फोटो )


रोज तीन-चार हजार रुपए का फायदा
कारोबार से जुड़ीं ललिता देवी के अनुसार, एक किलो महुआ से 35 लड्डू बनते हैं. दोनों गांवों की महिलाएं 2000 लड्डू बनाती हैं और होटलों और दुकानों में पांच रुपए पीस बेचती हैं. 2000 लड्डू बनाने में 57 से 60 किलो महुआ की जरूरत होती है. महिलाएं 25 से 28 रुपए किलो महुआ खरीदती हैं. एक लड्डू बनाने में 71 पैसे का महुआ लगता है. अन्य सामग्री की लागत मिलाकर कुल तीन से साढ़े तीन रुपए खर्च होते हैं. हर दिन तीन-चार हजार रुपए का फायदा होता है.

ऐसे तैयार होता है लड्डू 
सबसे पहले महुआ को पानी में फुलाया जाता है. इसके बाद उसे सुखाकर घी में तला जाता है. तले महुआ में तीसी, ड्राई फ्रूट्स, सौंफ, इलायची व गुड़ मिलाकर ओखली में कूटा जाता है. इसके बाद लड्डू बनाया जाता है. ग्रामीण रात में जंगल चले जाते हैं और सुबह तक महुआ चुनते हैं. इसे सुखाकर 25-30 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता है. महुआ बेचकर ग्रामीणों का चार महीने का घर खर्च निकल जाता है. यहां के महुआ की डिमांड गया, पटना सहित अन्य जिलों में है.

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First published: July 22, 2019, 2:42 PM IST
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