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वेदों में है इस मंदिर का उल्लेख, नवरात्र पर मत्था टेकने से पूरी होती हैं सारी मनोकामनाएं

मां भद्रकाली मंदिर, चतरा
मां भद्रकाली मंदिर, चतरा

मुख्य पुजारी के मुताबिक यहां मां की मूर्ति काले गोमेद पत्थर की बनी हुई है और मां वरदायिनी रूप में हैं.

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झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक, चतरा के ईटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में इन दिनों भक्तों का तांता लगा हुआ है. शारदीय नवरात्र को लेकर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे रहे हैं. मां भद्रकाली का दरबार 51 कलशों से सुज्जित है.

चतरा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मां भद्रकाली के इस मंदिर को छठी शताब्दी में पाल वंशीय शासकों ने बनाया था. मंदिर के मुख्य पुजारी नागेश्वर बाबा ने बताया है कि इस मंदिर का उल्लेख वेदों में भी है. उन्होंने बताया कि मां भद्रकाली का यह दरबार काफी प्राचीन है और राजा-महाराजों के द्वारा इस दरबार में पूजा करने का भी उल्लेख है. मुख्य पुजारी के मुताबिक यहां मां की मूर्ति काले गोमेद पत्थर की बनी हुई है और मां वरदायिनी रूप में हैं. यही वजह है कि इस दरबार में भक्तों की सभी कामनाएं पूरी होती हैं.

मां भद्रकाली मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिये झारखंड के अलावा दूसरे प्रदेश के भी भक्त सपरिवार पहुंचते हैं. गया से पूजा करने आयी भक्त ने बताया कि वह प्रत्येक वर्ष अपने परिवार के साथ मां के दरबार में पूजा करने के लिये आती हैं. मां के दरबार में इनदिनों स्थानीय भक्तों का भी तांता लगा हुआ है. शारदीय नवरात्र में मां भद्रकाली की पूजा करने का विशेष महत्व है.



मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य रतन शर्मा का कहना है कि यहां भक्तों को सभी सुविधायें मुहैया करायी जाती हैं. शारदीय नवरात्र के मौके पर समिति का कार्यालय चौबीसे घंटे खुला रहता है.
(संतोष कुमार की रिपोर्ट)

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