देवघर: बाबा मंदिर की गलियों में सन्नाटा, आर्थिक संकट में घिरे पूजा सामग्री बेचने वाले 3 हजार दुकानदार
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देवघर: बाबा मंदिर की गलियों में सन्नाटा, आर्थिक संकट में घिरे पूजा सामग्री बेचने वाले 3 हजार दुकानदार
लॉकडाउन के कारण बाबा मंदिर के आसपास दुकान चलाने वालों की हालत खराब हो गई है.

देवघर में बाबा मंदिर (Baidyanath Dham) के आसपास सिंदूर-बिंदी बेचने वाले लगभग तीन हजार दुकानदार और खुदरा विक्रेता हैं. इनकी प्रतिदिन औसतन 300-400 रुपये की कमाई है.

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देवघर. कोरोना लॉकडाउन (Lockdown) लागू होते ही देवघर स्थित बाबा मंदिर (Baidyanath Dham) श्रद्धालुओं के लिए बंद हो गया.  लेकिन उनलोगों के सामने अब भुखमरी की समस्या पैदा हो गई है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सिंदूर, बिंदी एवं अन्य पूजा सामग्री बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे. सिंदूर बनाने वाली छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों के मालिक सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं, क्योंकि इनका काम भी पूरी तरह ठप हो गया है.

लॉकडाउन से पहले बाबा मंदिर के आसपास की गलियां दिन-रात श्रद्धालुओं से गुलजार रहा करती थीं, लेकिन आज इन गलियों में सन्नाटा पसरा है. दुकानों के शटर पिछले 45 दिन से बंद पड़े हैं. दरअसल लॉकडाउन के कारण बाबा मंदिर बंद है और इस वजह से श्रद्धालु भी देवघर नहीं आ रहे हैं. इसका सीधा असर सिंदूर-बद्दी बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले छोटे व्यापारियों पर पड़ा है.

पूजा सामग्री बेचने वाले 3 हजार दुकानदारों की हालत खराब  



देवघर में बाबा मंदिर के आसपास सिंदूर-बद्दी बेचने वाले लगभग तीन हजार दुकानदार और खुदरा विक्रेता हैं. प्रतिदिन औसतन इन्हें 3 से 4 सौ रुपये की कमाई हो जाती थी. लेकिन लॉकडाउन के बाद इनके सामने अब भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है. घूम-घूम कर बद्दी बेचने वालों की स्थिति तो और विकट हो गई है. किसी तरह गुजर-बसर करने के लिए ये लोग अब घर-घर जाकर बद्दी एवं अन्य पूजा समाग्री बेचने को मजबूर हैं.
तीन दर्जन छोटे-बड़े सिंदूर फैक्ट्रियों में ताले 

तीर्थनगरी होने के कारण देवघर में सिर्फ सिंदूर का लगभग 50 करोड़ का सालाना कारोबार होता है. यही कारण है कि देवघर और इसके आसपास लगभग तीन दर्जन छोटे-बड़े सिंदूर बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं. लेकिन कोरोना बंदी के कारण इन फैक्ट्रियों में भी ताला लगा हुआ है. फैक्ट्री मालिक भी अब सरकार से कोई सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह कर रहे हैं. इनकी माने तो संताल परगना की अर्थव्यवस्था बाबा मंदिर पर निर्भर करती है. हालंकि इन्हें लॉकडाउन के बाद रोजी-रोजगार पटरी पर आने की उम्मीद है. लॉकडाउ 3.0 की अवधि 17 मई को समाप्त होगी.

रिपोर्ट- रितुराज सिन्हा

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