Assembly Banner 2021

Deoghar News: चितरा कोलियरी में दुहरा सकती है राजमहल जैसी बड़ी खान दुर्घटना, जान हथेली पर लेकर काम कर रहे मजदूर

चितरा कोलियरी में हर साल 25 लाख टन कोयले का खनन होता है.

चितरा कोलियरी में हर साल 25 लाख टन कोयले का खनन होता है.

Deoghar News: चितरा कोलियरी में खनन कार्य के लिए आगे बढ़ने की जगह नहीं होने के कारण वर्टिकल खनन किया जा रहा है. इससे खदान की गहराई बढ़ती जा रही है. और कोयले की चट्टानों की ऊंची दीवारें खड़ी हो रही हैं. ये दीवारें बड़ी दुर्घटना को दावत दे रही हैं.

  • Share this:
देवघर. झारखंड के देवघर (Deoghar) में ECL के चितरा कोलियरी (Chitra Mines) में खान सुरक्षा नियमों की अनदेखी हो रही है. यहां जान हथेली पर लेकर मजदूर काम कर रहे हैं. खदान के अंदर कोयले की ऊंची दीवार के दरकने से राजमहल परियोजना जैसी बड़ी खान दुर्घटना का अंदेशा मजदूरों द्वारा जताया जा रहा है. लिहाजा मजदूर अनहोनी की आशंका के साये में काम करने को मजबूर हैं. चितरा खदान में प्रति वर्ष 25 लाख टन कोयले का खनन होता है. लेकिन यहां खान सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है.

मजदूर नेता पशुपति कोल बताते हैं कि इस ओपन कास्ट कोलियरी में खनन कार्य के लिए आगे बढ़ने की जगह नहीं होने के कारण वर्टिकल खनन हो रहा है. इससे खदान की गहराई बढ़ती जा रही है और कोयले के चट्टानों की ऊंची दीवार खड़ी हो रही है.

खदान में काम कर रहे मजदूर गुलाब और जीतलाल टुडू के अनुसार खान के अंदर कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. कोयले की चट्टानों के दरकने से यहां राजमहल परियोजना जैसी दुर्घटना दुहरा सकती है. फिर भी मजदूर जान हथेली पर लेकर काम कर रहे हैं.



बंद हो सकता है कोलियरी
जीएमइस कोलियरी में कोयला खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित होने के कारण खनन कार्य प्रभावित हो रहा है. खुद एसपी माइन्स चितरा कोलियरी के जीएम संजय कुमार सिंह भी मान रहे हैं कि जमीन के अभाव में कोयले का उत्पादन 25 से घट कर 7 लाख टन हो गया है. और खनन के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ तो कोलियरी को बंद करना पड़ सकता है.

हालांकि जीएम का दावा है कि खननकार्य में सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जा रहा है. चितरा कोलियरी ECL के उन खदानों में से एक है जो प्रत्येक वर्ष कंपनी को अच्छा मुनाफा दे रहा है. पिछले वर्ष भी कंपनी को यहां से 260 करोड़ का मुनाफा हुआ था. बावजूद इसके खान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर मजदूरों की जान को खतरे में डाला जा रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज