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मथुरा के बाद जल्द देवघर के प्रसिद्ध ‘पेड़े’ को मिलेगा जीआई टैग

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर का प्रसिद्ध प्रसाद पेड़ा ही है.

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर का प्रसिद्ध प्रसाद पेड़ा ही है.

Deoghar Peda: देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि उन्होंने जिले के सभी पेड़ा निर्माताओं को 30 सितंबर तक उद्योग विभाग में अपना पंजीकरण कराने को कहा है. इसके बाद वह पेड़े की जीआई टैगिंग के लिए उपयुक्त प्राधिकार के पास औपचारिक आवेदन देंगे.

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    देवघर. मथुरा (Mathura) की तरह देवघर के पेड़े (Deoghar Peda) को भी जल्द जीआई टैग (GI Tag) मिलने वाला है. इससे देवघर के पेड़े को न केवल वैश्विक मान्यता मिलेगी, बल्कि इसके कारोबार में भी उछाल आएगा. जहां तक देवताओं पर प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाने वाली सबसे पसंदीदा मिठाई पेड़े की बात है, तो मथुरा अपना जीआई टैग हासिल करके अन्य धार्मिक स्थलों से आगे चल रहा है. अब प्रसिद्ध देवस्थल बाबा बैद्यनाथ धाम अर्थात देवघर इसी राह पर आगे बढ़ रहा है.

    टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि उन्होंने जिले के सभी पेड़ा निर्माताओं को 30 सितंबर तक उद्योग विभाग में अपना पंजीकरण कराने को कहा है. इसके बाद वह देवघर के पेड़े की जीआई टैगिंग के लिए उपयुक्त प्राधिकार के पास एक औपचारिक आवेदन देंगे.

    जीआई टैग किसी विशेष खाद्य, कृषि या औद्योगिक उत्पाद की उत्पत्ति के क्षेत्र को परिभाषित करता है. यह टैग वस्तुओं के भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत दिया जाता है. यह टैग भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है.

    भजंत्री ने कहा कि उन्होंने जिले के पेड़ा निर्माताओं को जीआई टैग के लाभों से अवगत कराने के लिए उनके साथ कुछ बैठकें की हैं. उन्होंने कहा, “हम जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं ताकि अधिक से अधिक व्यापारी अपना पंजीकरण करा सकें.” उन्होंने कहा कि जीआई टैग के बाद, देवघर पेड़ों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक मिल सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि विक्रेता उन्हें ऑनलाइन मोड और फूड एग्रीगेटर्स का उपयोग करके साल भर बेच सकते हैं.विशेष रूप से लघु और कुटीर उद्योगों के उत्थान और बेहतरी के लिए गठित मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड पेड़ा निर्माताओं के साथ जागरूकता सत्र भी आयोजित कर रहा है ताकि उन्हें जिले के उद्योग विभाग के साथ खुद को पंजीकृत करने के लिए प्रेरित किया जा सके. बोर्ड राज्य उद्योग विभाग की एक शाखा है.

    जिला समन्वयक नीरज कुमार ने बताया कि अब तक 10 पेड़ा निर्माताओं ने अपना पंजीकरण कराया है. उन्हें यकीन है कि जल्द ही कई और पेड़ा निर्माता इस रास्ते पर चलेंगे. उन्होंने कहा, “देवघर जिले में देवघर और घुमारा दो ऐसे स्थान हैं जिन्हें पेड़ा निर्माताओं का केंद्र माना जाता है. लगभग 200 कारोबारी कई पीढ़ियों से इस व्यवसाय में जुटे हैं. हम जीआई प्रमाणन एजेंसी को औपचारिक आवेदन करने से पहले अधिकतम व्यापारियों को प्रेरित करने की कोशिश कर रहे हैं.”

    कुमार ने कहा कि एक बार स्थानीय व्यापारियों के लिए पंजीकरण खिड़की बंद हो जाने के बाद, वे एक सोसायटी बनाएंगे. उन्होंने कहा, “केवल वे लोग ही मंजूरी के बाद जीआई टैग का इस्तेमाल कर सकेंगे जो सोसाइटी के सदस्य होंगे.” जीआई पंजीकरण प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया में आवेदन जमा करने के बाद लगभग दो-तीन महीने लगते हैं.

    झारखंड में हजारीबाग का पारम्परिक सोहारी-खोवर आर्ट जीआई टैग हासिल करने वाला पहला आर्ट फॉर्म है, जिसे गत वर्ष मई में यह टैग दिया गया था.

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