देवघर: श्रावणी मेले को लेकर इस बार भी संशय, कैसे जलेंगे हजारों घर के चूल्हे?

कोरोना के चलते पिछले साल भी श्रावणी मेला नहीं लगा था.

Deoghar News: श्रावणी मेला शुरू होने से 3 महीने पहले से ही देवघर में तैयारी शुरू हो जाती थी. लेकिन इस बार अबतक सरकार ने गाइडलाइन भी जारी नहीं की है. ऐसे में मेले को लेकर संशय बना हुआ है. पिछले साथ कोरोना के चलते मेले नहीं लगा था.

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    रिपोर्ट- मनीष दुबे

    देवघर. विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला (Shravani Mela) बाबा बैद्यनाथ धाम में पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था. वहीं इस वर्ष भी कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए इसको लेकर संशय के बादल छाए हुए हैं. दरअसल बाबा मंदिर (Baidyanath Dham Temple) पर आश्रित लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है. कोरोना के चलते पिछले वर्ष में कोई कमाई नहीं हुई. किराए के साथ सभी जरूरी चीजों के पैसे उन्हें देने पड़े. वहीं इस वर्ष भी अगर श्रावणी मेला नहीं लगा, तो मंदिर के तीर्थ पुरोहित समाज के साथ-साथ तमाम छोटे -छोटे दुकानदार प्रभावित होंगे, जो श्रावणी मेला से कमाई कर साल भर घर परिवार चलाते हैं.

    जिस मेले से देवघर की पहचान है. जिस कांवरिया पथ पर लाखों गेरुआ वस्त्र धारी बोलबम के नारे लगाते हुए बाबा नगरी पहुंचते थे. जिस मेले की बदौलत छह महीनों तक लाखों लोगों की रोजी-रोटी चलती थी. आज वहां विरानी है. पिछले दफा श्रावणी मेला लगने को लेकर संशय था. लिहाजा एक उम्मीद के सहारे पूरा सावन समाप्त हो गया. मेला नहीं लगने से आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई. लेकिन इस बार उम्मीद ने भी दामन छोड़ दिया है. कुल मिलाकर रोजी-रोटी पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया है.

    श्रावणी मेला शुरू होने के 3 महीने पहले से ही यहां सरकार के द्वारा कार्य शुरू कर दिए जाते थे. लेकिन इस बार जैसे उम्मीदें सिस्टम का दामन छोड़ चुकी हैं. सरकार के द्वारा कोई गाइडलाइन नहीं आने से इस बार कोई सुगबुगाहट भी नजर नहीं आती.

    कांवरिया पथ के स्थानीय लोग कहते हैं कि इस कांवरिया पथ से लाखों लोगों का पेट भरता था. सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार और अन्य राज्यों से भी लोग यहां अपनी रोजी-रोटी के जुगाड़ में आया करते थे. लेकिन इस बार उम्मीद ने भी दामन छोड़ दिया है. दूसरी तरफ मंदिर से जुड़े व्यवसाय भी अब बंद हो चुके हैं. ऐसे में आश्रम संचालक और पुरोहित भी बताते हैं कि पिछले वर्ष श्रावणी मेला नहीं आयोजित होने के कारण इनकी माली हालत काफी खराब हो गई थी. इस बार भी कोई उम्मीद नहीं है. ऐसे में अब इनकी कमर ही टूट गई है.

    कुल मिलाकर आश्रम संचालक, पुरोहित और लाखों वैसे लोग जो मेला और कांवरिया पथ में अपनी दुकानें लगाकर 6 महीने तक अपनी रोजी-रोटी चलाते थे, वे अब मायूस नजर आ रहे हैं.

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