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Jharkhand Ravan Dahan 2022: देवघर में नहीं होता है रावण का पुतला दहन, जानें वजह

झारखंड के देवघर में रावण का पुतला नहीं दहन किया जाता है

झारखंड के देवघर में रावण का पुतला नहीं दहन किया जाता है

Jharkhand News: झारखंड के देवघर में रावण का पुतला नहीं फूंके जाने के पीछे मान्यता है कि रावण ही कैलाश से भोलेनाथ का ज्य ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बुधवार को देश भर में विजयादशमी की धूम है
झारखंड के देवघर की पहचान बाबा नगरी के रूप में होती है
देवघर में शुरू से ही रावण का पुतला नहींं दहन किया जाता है

रिपोर्ट- मनीष दुबे

देवघर. बुधवार को पूरे देश में विजयादशमी की धूम है. हर जगह माता की अराधना की जा रही है साथ ही आज विजयादशमी में हर जगह रावण का पुतला दहन भी किया जा रहा लेकिन देवाधिदेव महादेव की नगरी में रावण का पुतला दहन की परंपरा नही है. यहां रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है. बैद्यनाथ धाम के पुरोहित दुर्लभ मिश्रा बताते हैं कि देश में आज सभी जगह रावण का दहन किया जाता है लेकिन देवघर में रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है.

विजयादशमी को है रावण दहन की परंपरा

इसके पीछे का कारण यह है कि रावण एक महान पंडित और ब्राह्मण थे. वो शिव के सबसे बड़े भक्त थे रावण के दस मुंड थे जिसमें 5 सात्विक और शेष 5 तमशिक जब कैलाश से रावण बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग को लेकर आ रहे थे तो वो सात्विक कर्म था. रावण की वजह से ही यहां देवघर में कामनालिंग बाबा बैद्यनाथ लाया गया, हालांकि स्थपित विष्णु के द्वारा किया गया था लेकिन ज्योतिर्लिंग को लाने वाले रावण ही थे, यही वजह है कि देवघर में रावण का पुतला दहन नहीं होता है. रावण का पुतला दहन का तात्पर्य है कि हर इंसान में बुराई और अच्छाई है. आज विजयादशमी के दिन आज उस बुराई की खत्म करना है. अग्नि में उसकी आहूति देनी है. अपने क्रोध लोभ मोह को जलाना है अपने अंदर के रावण को जलाना ही रावण का पुतला दहन है.

12 ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठों में से एक है देवघर

देवघर बाबा बैद्यनाथ के साथ माता का भी स्थान माना जाता है. यह विश्व का एकलौता शिव मंदिर है जहां शिव और शक्ति विराजमान हैं. मान्यता है की सती वियोग में माता सती के 51 टुकड़े किये गए जिस जिस स्थान पर माता के अंग गिरे वो शक्ति पीठ कहलाया. देवघर में माता का हृदय गिरा था, इसी वजह से ये शक्ति पीठ कहलाया और माता यहां पहले से विराजमान थीं. इसलिए जब रावण कैलाश से ज्योतिर्लिंग को लंका ले जा रहे थे तो देवताओं ने यहा बाबा बैद्यनाथ की स्थापना की थी.

Tags: Jharkhand news, Vijayadashami, Vijayadashmi

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