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पूंजी के अभाव में दम तोड़ रहा झुमरबाद का कालीन उद्योग

Rituraj Sinha | News18 Jharkhand
Updated: September 9, 2018, 10:04 PM IST
पूंजी के अभाव में दम तोड़ रहा झुमरबाद का कालीन उद्योग
झुमराबाद के कालीन कारीगरों का बनाया एक बहतरीन नमूना

देवघर के झुमरबाद में कालीन बनाने का धंधा एक कुटीर उद्योग के रुप में विकसित हो रहा है.यहां का बना कालीन बनारस के अलावा सऊदी अरब व खाड़ी के अन्य देशों तक पसंद की जा रही हैं. लेकिन पूंजी के अभाव में कालीन बनाने का यह धंधा अब दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गया है

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देवघर के झुमरबाद में कालीन बनाने का धंधा एक कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है.यहां का बना कालीन बनारस के अलावा सऊदी अरब व खाड़ी के अन्य देशों तक पसंद की जा रही हैं. लेकिन पूंजी के अभाव में कालीन बनाने का यह कालीन उद्योग अब दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गया है.देवघर स्थित झुमरबाद के कालीन बनाने वाले कारीगर फ्रेम पर खींचे धागों पर तेज़ उंगलियां फेर कर इन धागों को रंग-बिरंगे कालीन का शक्ल देते ये हैं. फिलहाल यहां पर एक स्वयं सहायता समूह के तहत 10 कारीगर कालीन बनाने का काम कर रहे हैं. इसके लिए इन्हें कच्चा धागा बनारस से लाना पड़ता है और फिर तैयार कालीन इन्हें बनारस की मंडियों तक पहुंचाना पड़ता है.

एक तरफ सरकार कौशल विकास के जरिये लोगों को हुनरमंद बना कर उन्हें स्वाबलंबी बनाने का दाबा कर रही है, वहीं देवघर के झुमरबाद के हुनरमंद कारीगर पूंजी के अभाव में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने को मजबूर हैं. खास बात है कि यहां तैयार की गई कालीनें सऊदी अरब सहित खाड़ी के देशों में खूब पसंद की जाती हैं.लेकिन पूंजी के अभाव में कालीन बनाने का यह कुटीर उद्योग जमने से पहले ही उजड़ने के कगार पर पहुंच गया है. समूह के मुख्य कारीगर शमसुद्दीन अंसारी की मानें तो अगर सरकार ध्यान दे तो आसपास के गांव के 300 से अधिक कारीगरों को इस उद्योग से जोड़ कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है.

आधरभूत संरचना के नाम पर सरकार ने सिर्फ एक शेड का निर्माण जरूर करा दिया गया है लेकिन वर्किंग कैपिटल के अभाव में क्षमता के अनुरूप यहां कालीन की बुनाई नहीं हो पा रही है. स्थानीय कारीगर भी मानते हैं कि अगर पूंजी की समस्या दूर हो जाए तो काम की तलाश में बाहर का रुख करने वाले स्थानीय कारीगरों को घर पर ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा.

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First published: September 9, 2018, 8:28 PM IST
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