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RTI के तहत पशु शेड निर्माण में सरकारी राशि की बंदरबांट का खुलासा, जांच की मांग

Rituraj Sinha | News18 Jharkhand
Updated: September 16, 2018, 1:18 PM IST
RTI के तहत पशु शेड निर्माण में सरकारी राशि की बंदरबांट का खुलासा, जांच की मांग
प्रखंड सह अंचल कार्यालय, देवीपुर, देवघर

पंचायत में सरकारी योजनाओं के नाम पर घोटाले की बात सामने आने से ग्रामीणों में आक्रोश है. ग्रामीणों ने उपायुक्त से लिखित शिकायत कर जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण में जाने का भी मन बना लिया है.

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देवघर के देवीपुर प्रखंड में पशु शेड और बकरी शेड निर्माण में अनियमितता और लाखों की राशि की बंदरबांट की बात सामने आई है. सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसकी
पुष्टि हुई है. स्थानीय ग्रामीणों द्वारा इसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है.

सबका साथ सबका विकास. समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी विकास की इस प्रक्रिया में शामिल हो कर लाभान्वित हो सके. इसी उद्देश्य से सरकार इस मूलमंत्र को लेकर काम कर
रही है. लेकिन देवघर के देवीपुर प्रखंड अंतर्गत भोजपुर पंचायत में विकास के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट का मामला सामने आया है. इसने सभी को हैरानी में डाल दिया है.

दरअसल इस पंचायत में पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा योजना अंतर्गत पशु और बकरी शेड निर्माण के नाम पर 55 लाख से अधिक की राशि की निकासी की गई. लगभग 100 लाभुकों की सूचि तैयार कर इस मद में 35 लाख 24 हज़ार 755 रुपयों का खर्च दिखाया गया. मगर शेष 19 लाख 82 हज़ार 275 रुपयों की राशि की मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी की मिली भगत से अवैद्ध निकासी कर ली गई. इस बात की पुष्टि गांव के ही राजेन्द्र मिस्त्री द्वारा सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में हुई है.

हैरानी की बात है कि पंचायत में अधिकतर पशु शेड या बकरी शेड का निर्माण अधूरा है. लेकिन इन सब के नाम से कागज पर राशि का पूरा भुगतान दिखा दिया गया है. इनमें से कुछ लाभुक तो ऐसे हैं जिन्हें
पता भी नहीं है कि उनके नाम से योजना स्वीकृत हुई है.पंचायत में सरकारी योजनाओं के नाम पर घोटाले की बात सामने आने से ग्रामीणों में आक्रोश है. ग्रामीणों ने उपायुक्त से लिखित शिकायत कर जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण में जाने का भी मन बना लिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारी द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है.

हैरानी की बात है कि अधिकारी के नाक के नीचे सरकारी राशि की बंदरबांट का इतना बड़ा खेल चलता रहा और अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी. जब एक पंचायत में योजना के नाम पर इतनी बड़ी राशि के गबन की बात सामने आ रही है तो जाहिर तौर पर पूरे जिले में इन योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच होने पर कई चौकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं.

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First published: September 16, 2018, 12:48 PM IST
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