बाबा बैद्यनाथ मंदिर में चढ़ने वाले फूल-बेलपत्र से बन रहा जैविक खाद

फूल-बेलपत्र में गोबर मिलाकर ढेर लगाया जाता है. हर ढेर में एक-एक किलो केंचुआ छोड़ा जाता है. 60 दिन में ये केंचुए मिक्सचर को खाद बना देते हैं.

News18 Jharkhand
Updated: September 10, 2019, 1:43 PM IST
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में चढ़ने वाले फूल-बेलपत्र से बन रहा जैविक खाद
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में चढ़ने वाले फूल और बेल पत्र से जैविक खाद बनाया जाता है.
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Updated: September 10, 2019, 1:43 PM IST
देवघर. बाबा बैद्यनाथ पर रोज अर्पित होने वाले फूल और बेलपत्र को इधर-उधर फेंकने की जगह अब इससे खाद बनाने की पहल शुरू हुई है. राजेन्द्र केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर और आईसीएआर भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल के साथ मिलकर देवघर कृषि विज्ञान केंद्र ने फूल और बेलपत्र से ऑर्गेनिक खाद बनाने की शुरुआत की है. दरअसल बाबा बैद्यनाथ मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं. इसी क्रम में वे फूल और बेलपत्र भी चढ़ाते हैं. मंदिर प्रबंधन के सामने इन्हें निबटाने की बड़ी चुनौती थी. मंदिर परिसर को साफ- सुथरा रखने में भी परेशानी आ रही थी. इसको देखते हुए देवघर कृषि विज्ञान केंद्र ने यह तरकीब निकाली.

इस तरह बनाया जाता है खाद 

देवघर कृषि विज्ञान केन्द्र के समन्वयक पीके सनिग्रही कहते हैं कि मंदिर से निकले इन फूल-बेलपत्रों से केंचुआ खाद बनाया जा रहा है. इससे जैविक खेती करने वाले किसानों को काफी लाभ मिलेगा. फिलहाल 8 रुपये प्रति किलो की दर से यह खाद हमलोग बेच रहे हैं.

पीके सनिग्रही ने बताया कि फूल-बेलपत्र में गोबर मिलाकर ढेर लगाया जाता है. हर ढेर में एक-एक किलो केंचुआ छोड़ा जाता है. 60 दिन में ये केंचुए मिक्सचर को खाद बना देते हैं. खाद बनने के बाद यह चायपत्ति की तरह दिखता है और इसमें कोई दुर्गंध नहीं होता.

baba baidyanath temple
जलाभिषेक के दौरान भक्त बाबा बैद्यनाथ पर फूल और बेलपत्र भी चढ़ाते हैं.


जैविक खेती को मिलेगा लाभ   

फिलहाल इस खाद की खरीदारी नाबार्ड, स्वयं सेवी संस्थाएं और जिला कृषि विभाग कर रहे हैं. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र भी इसका इस्तेमाल बागवानी के लिए कर रहा है. इस खाद को लेकर फूल की खेती करने वाले किसान भी काफी उत्साहित हैं. किसानों की माने तो आने वाले समय में यह रासायनिक खाद का अच्छा विकल्प साबित होगा. गुलाब फूल और अमरूद की खेती में इसके उपयोग से अच्छे नतीजे मिल रहे हैं. इधर फूल और बेलपत्र का निबटारा होने से बैद्यनाथ मंदिर परिसर भी साफ-सुथरा रह रहा है.
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इनपुट- रितुराज सिन्हा

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First published: September 10, 2019, 1:42 PM IST
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