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पत्थर उत्खनन को अवैध बता रहे स्थानीय, शिकायत के बाद भी खनन विभाग शिथिल

Rituraj Sinha | News18 Jharkhand
Updated: June 20, 2018, 2:47 PM IST
पत्थर उत्खनन को अवैध बता रहे स्थानीय, शिकायत के बाद भी खनन विभाग शिथिल
आबादी वाले क्षेत्र में पत्थर उत्खनन को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष देखा जा रहा है.

पूरा क्षेत्र 22 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें जमीन और पहाड़ हैं. लोग बता रहे हैं 15 से 16 एकड़ जमीन को लीज पर लिया गया है. मगर बचे 6 एकड़ की जमीन पर अवैध खनन किया जा रहा है.

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देवघर में बड़े पैमाने पर पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. पर्यावरण और खनन नियमों की धज्जियां उड़ाते पत्थर माफिया स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बाबजूद घनी आबादी वाले क्षेत्र में विस्फोट कर खनन कर रहे हैं. हैरानी की बात है कि प्रसिद्ध पर्यटन स्थल तपोवन पहाड़ के ठीक पीछे अवैध खनन किया जा रहा है और खनन विभाग इससे अनभिज्ञ बना हुआ है.

बता दें कि तपोवन के ठीक पीछे दूर-दूर तक खुले मैदानी भू-भाग से घिरे छोटी-बड़ी पहाड़ियां हैं. लेकिन ये पूरा का पूरा इलाका अब पत्थर माफिया के हवाले है. इन पत्थर माफियाओं द्वारा खुलेआम विस्फोट कर यहां पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. आसपास के ग्रामीणों द्वारा इसका विरोध करने के बाद भी उत्खनन बे-रोक टोक जारी है.

अवैध उत्खनन पर एक स्थानीय गोविंद यादव ने कहा कि पूरा क्षेत्र 22 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें जमीन और पहाड़ हैं. लोग बता रहे हैं 15 से 16 एकड़ जमीन को लीज पर लिया गया है. मगर बचे 6 एकड़ की जमीन पर अवैध खनन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस अवैध उत्खनन कार्य में स्थानीय और बाहर के लोग शामिल हैं. इसके विरोध में स्थानीय लोगों ने लिखित शिकायत भी की मगर खनन विभाग ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया. उन्होंने कहा कि इस अवैध उत्खनन से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है.

वहीं इस संदर्भ में देवघर के जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि अवैध उत्खनन के आरोप कई बार लगाए गए हैं. मगर वहां पर कानून के तहत लीज दिया गया है. इसके बावजूद अगर वहां पर बिना किसी सही कागजत के खनन किया जा रहा है तो उसकी जांच करूंगा. उन्होंने कहा कि जब कभी भी पर्यावरण क्लीयरेंस दी जाती है तब उसके तहत माइनिंग प्लान होता है. पर्यावरण क्लीयरेंस से पहले माइनिंग करनेवाले को डीएफओ की और सीओ की रिपोर्ट लेनी पड़ती है. इसके बाद प्रदूषण विभाग से भी क्लीयरेंस दी जाती है. साथ ही खान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) से भी अनुमति लेनी पड़ती है. इन सबके बाद ही उत्खनन किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अगर सारे पेपर्स होने के बाद माइनिंग की जा रही है तो उन्हें नहीं लगता कि इसमें कुछ गलत है. उन्होंने कहा कि लेकिन चूंकि ये आरोप स्थानीय लोगों का है और उनके संज्ञान में लाया गया है, इसलिए वे इसकी जांच करेंगे.

मालूम हो कि देवघर के अलग अलग जगहों पर इस समय खास कर पत्थर माफिया के करतूत लगातार सामने आ रहे हैं. कार्रवाई के नाम पर पत्थर और गिट्टी लदे ट्रक को पकड़ कर खानापूर्ति भी की जाती रही है. लेकिन इस पर पूरी तरह लगाम लगाने में विभाग सफल नहीं हो पाया है.

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First published: June 20, 2018, 2:47 PM IST
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