देवघर पुलिस ने 11 साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार, 36 मोबाइल बरामद
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देवघर पुलिस ने 11 साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार, 36 मोबाइल बरामद
पुलिस की गिरफ्त में खड़े साइबर अपराधी.

देवघर (Deoghar) साइबर पुलिस (Cyber ​​police) ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करके 11 साइबर अपराधियों (Cyber ​​criminals) को गिरफ्तार किया है. सभी बदमाश आम लोगों को डिजिटल (Digital) माध्यम से ठगते थे.

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  • Last Updated: September 9, 2020, 5:30 PM IST
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देवघर. देवघर पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. गुप्त सूचना के आधार पर देवघर साइबर पुलिस ने छापेमारी करके 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. इनमें से 1 पथरौल थाना अंतर्गत रुपाबाद से और 10 मधुपुर थाना के बड़ा राजाबांध के रहने वाले हैं.देवघर एसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपी शातिर साइबर अपराधी हैं. इनमें से पथरौल थाना से गिरफ्तार संतोष दास पहले साइबर अपराध में जेल जा चुका है और अभी ज़मानत पर है. बाकी मधुपुर से गिरफ्तार 10 में से 4 आरोपी आपस में चाचा-भतीजा लगते हैं. इनके साइबर फ्रॉड करने के तरीके की जानकारी देते हुए एसपी ने बताया कि कस्टमर केयर या बैंक प्रतिनिधि बनकर इनके द्वारा ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनसे उनका बैंक डिटेल्स पूछा जाता था.

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इसे बाद फोन पे या पेटीएम रिक्वेस्ट भेज कर उनसे ओटीपी प्राप्त कर राशि ट्रांसफर कर ली जाती थी. पुलिस ने इनके पास से 60 हजार नगद, 36 मोबाइल फोन, 46 सिम कार्ड, 9 ATM कार्ड, 11 पासबुक और एक लैपटॉप जब्त किया है. पुलिस इनसे कड़ी पूछताछ कर इनके अन्य लिंक की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है. गिरफ्तार अपराधियों में संतोष दास की गिरफ्तारी पथरौल थाना अंतर्गत रुपाबाद से हुई है. यह पहले भी साइबर फ्रॉड के मामले में जेल जा चुका है. इसके ऊपर मधुपुर थाना में 2017 में मामला दर्ज है. इसके अलावा मधुपुर थाना के बड़ा राजाबांध में 10 अपराधी गिरफ्तार हुए हैं, जिनका नाम-डब्लू दास, संजीत दास, आनंदी दास, कुंदन दास, सिकंदर दास, रंजीत कुमार दास, चंदन कुमार दास, जमुना दास, जितेंद्र कुमार दास और विकास दास है.



ऐसे अपराध को देते थे अंजाम
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आपोरी डिजिटल फ्रॉड करते थें. इसके लिए वह बैंक या किसी अंन्य कंपनी का प्रतिनिधि बनकर आपके खाते और बीमा पॉलिसी के बारे में जानकारी लेते थे. इसके बाग मोबाइन में कई मैसेज भेजकर उसका ओटीपी पूछते थे या फिर कोई लिंक भेजकर सामने वाले से उप पर क्लिक करन के लिए कहते थे. ऐसा करने पर खाता लॉग-इन हो जाता है और बदमाश पैसे उठाकर फरार ह जाते हैं.
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