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नसबंदी के बावजूद गर्भवती हुई महिला, होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए की हर्जाने की मांग

नसबंदी के बावजूद गर्भवती हुई महिला, होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए की हर्जाने की मांग

देवघर में एक अजीब मामला सामने आया है. एक महिला गर्भवती हो गई तो उसने प्रशासन से होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए हर्जाने की मांग की है. प्रशासन का कहना है कि आवेदन के आधार पर ही हर्जाना मिलेगा.

    झारखंड के देवघर में एक अजीब मामला सामने आया है. एक महिला गर्भवती हो गई तो उसने प्रशासन से होने वाले बच्चे की परवरिश के लिए हर्जाने की मांग की है. प्रशासन का कहना है कि आवेदन के आधार पर ही हर्जाना मिलेगा.

    देवघर के सारठ प्रखंड के लखना गांव की महिला कलावती गर्भवती हो गई है. इस पर उसने और उसके पति ने प्रशासन से हर्जाने की मांग की है. दरअसल कलावती ने दो साल पहले 25 जनवरी 2014 को मधुपुर अनुमंडल अस्पताल में नसबंदी कराई थी.

    कलावती और उसके पति जीतन पंडित को विश्वास था कि अब कलावती गर्भवती नहीं होगी, लेकिन अब वह गर्भवती हो गई है. कलावती का पति जीतन दिव्यांग  है. इनके एक बेटा और बेटी पहले से है.

    जीतन कुम्हार का काम किया करता है और किसी तरह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करता है. गरीबी की वजह से बच्चों की परवरिश में दिक्कत को देखते हुए जीतन ने अपनी पत्नी की नसबंदी कराई थी.

    पहले से दो बच्चे और अनचाहे बच्चे की परवरिश को लेकर जीतन काफी परेशान है. जीतन और कलावती ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से हर्जाने की मांग की है. जीतन ने कहा कि मैं दिव्यांग हूं, ऐसे में तीसरे बच्चे की परवरिश कर पाना बहुत कठिन है. प्रशासन हमें बच्चे की परवरिश के लिए हर्जाना दे.

    इस बारे में मधुपुर अनुमंडल अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुनील मरांडी से बात की गई तो उनके द्वारा आवेदन के आधार पर मुआवजा देने की बात कही गई. अधीक्षक ने भी स्वीकार किया कि नसबंदी के 1-2 प्रतिशत तक मामले असफल हो जाते है.

    Tags: देवघर

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