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झारखंड के इस शिव मंदिर में होती है फौजदारी मामलों की सुनवाई

झारखंड के इस शिव मंदिर में होती है फौजदारी मामलों की सुनवाई

किसी समस्या से परेशान हैं और बार बार भगवान के दर पर गुहार के बाद भी समाधान नहीं हो रहा तो इस शिवरात्रि जानिए दुमका के बासुकी नाथ मंदिर के बारे में. शिव भक्तों का मानना है कि मंदिर में फटाफट मामले सुझाए जाते हैं. इसलिए कहा जाता है इन्हें फौजदारी बाबा.

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    किसी समस्या से परेशान हैं और बार बार भगवान के दर पर गुहार के बाद भी समाधान नहीं हो रहा तो इस शिवरात्रि जानिए दुमका के बासुकी नाथ मंदिर के बारे में. शिव भक्तों का मानना है कि झारखंड के देवघर में जहां कामना ज्योतिर्लिंग यानि वैद्यनाथ धाम में जहां दीवानी मामलों की सुनवाई होती है, वहीं बासुकी नाथ धाम में फटाफट मामले सुझाए जाते हैं. इसलिए कहा जाता है इन्हें फौजदारी बाबा.

    जलाभिषेक के बाद होती पूजा पूरी

    देवघर में जलाभिषेक करने पहुंचे भक्त बासुकीनाथ में जलाभिषेक करना नहीं भूलते.देवघर से करीब 45 किलोमीटर दूर दुमका के बासुकीनाथ मंदिर में जलाभिषेक के बाद ही भक्तों की पूजा पूरी होती है.

    सालों से धरना पर बैठे हैं डॉक्टर, इंजीनियर

    फौजदारी बाबा के प्रति आस्था का आलम यह है कि कई भक्त तब तक बाबा के दरबार में धरना दिए पड़े रहते हैं जबतक कि उनकी मनोकामना पूरी नहीं हो जाए. कई सालों से धरना देने वाले आपको दुमका के बासुकी मंदिर में मिल जाएंगे. इनमें कई डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक भी आपको मिलेंगे. ऐसे ही एक धरणार्थी हैं बंधु झा. पेशे से सिविल इंजीनियर बंधु झा ने पांच साल पहले किसी शारीरिक परेशानी की वजह से दुमका में फौजदारी बाबा के सामने धरना दिया था. अब ऐसे रमे हैं कि दिल्ली में घर और परिवार होने के बावजूद बाबा की भक्ति में ही दिन और रात गुजार रहे हैं. ऐसे भक्तों की संख्या आपको दुमका में सैंकड़ो में मिल जाएगी.

    जानिए कथा

    भक्तों का कहना है कि बासुकीनाथ का क्षेत्र  पहले घने वनों का इलाका था. इसे दारुक वन कहा जाता था. पुराणों में उल्लेख है कि इसी वन में नागेश्वर ज्योतिर्लिग का निवास था. शिव पुराण में मिले वर्णन के अनुसार यह दारुक वन दारुक नाम के राक्षस के अधीन था. एकबार बासुकी नाम का एक आदमी कंद की खोज में औजार से मिट्टी निकाल रहा था. तभी उसका औजार जमीन में दबे शिवलिंग से टकरा गया और वहां से दूध की धारा बहने लगी. यह दृश्य देख करबासुकी घबरा गया और भागने लगा. तभी आकाशवाणी हुई. "भागो मत, यह मेरा निवास स्थान है. तुम मेरी पूजा करो. बासुकी वहां पूजा करने लगा और तभी से शिवलिंग की पूजा होने लगी जो आज भी जारी है.

    मलूटी के साथ धर्म सर्किट में जुड़ेगा बासुकी नाथ धाम  

    बासुकीनाथ मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के 22 मंदिर हैं. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ और मंदिरों के गांव से मशहूर मलूटी को जोड़कर धर्म-सर्किट बनवाने की घोषणा की है. दुमका जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है मलूटी गांव. पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इस गांव को मंदिरों का गांव कहा जाता है. इस गांव में 108 मंदिर बनाए गए थे. मलूटी में पहला मंदिर 1720 ई में वहां के जमीनदार राखड़चंद्र राय के द्वारा बनाया गया था.  देख रेख के अभाव में वर्तमान समय में 62 मंदिर ही शेष हैं. वर्ष 2015 के गणतंत्र दिवस समारोह में राज्य सरकार द्वारा दिल्ली में इसकी झांकी प्रस्तुत की गयी थी. झांकी को पुरस्कृत किए जाने के बाद यह गांव पर्यटन मानचित्र पर आया. राज्य सरकार द्वारा इस स्थल को विकसित करने के लिए साढ़े 13 करोड़ रुपए दिए गए हैं.

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