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इस गांव से सीख सकते हैं इंसानियत, एक बच्चे की जिंदगी के लिए टूट गईं मजहब की दीवारें!

News18 Jharkhand
Updated: June 15, 2018, 4:05 PM IST
इस गांव से सीख सकते हैं इंसानियत, एक बच्चे की जिंदगी के लिए टूट गईं मजहब की दीवारें!
मां के साथ अजित

12 साल के अजित को थैलेसेमिया है. उसे हर पंद्रह दिन पर नये खून की जरूरत होती है.

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समाज किसे कहते हैं? समाज का मतलब क्या होता है? इन जैसे सवालों का जवाब इन दिनों देवघर का केचुआबांध गांव दे रहा है. 12 साल के एक बच्चे को जिंदा रखने के लिए पूरा गांव एकजुट है. इस एकजुटता में जाति-धर्म की कोई दीवार नहीं है. बस इंसानियत की वह सोच है, जिसने समाज जैसी कल्पना को कभी आकार दिया होगा.

12 साल के अजित को थैलेसेमिया है. उसे हर पंद्रह दिन पर नए खून की जरूरत होती है. पहले तो विधवा मां ने इधर-उधर से पैसे का इंतजाम कर उसकी ये जरूरत पूरी की, लेकिन बाद में इसमें मुश्किल आने लगी. मां की परेशानी देखकर अजित से रहा ना गया और उसने कहा कि छोड़ दो मुझे मर जाने दो. बस यही बात गांववालों के दिल पर लग गई और गांववालों ने ठान लिया कि सब मिलकर अजित को जिंदा रखेंगे. तब से बारी-बारी से गांववाले अजित के लिए रक्तदान करते हैं और वही खून अजित को चढ़ाया जाता है.

गांववाले अजित को पूरे गांव का बच्चा मानते हैं. अजित के लिए कई बार खून दे चुके रेहान मिर्जा कहते हैं कि भले ही कौम अलग है लेकिन गांव एक है इस लिहाज से अजित की मां मेरी बहन है और जबतक अजित को खून की जरूरत होगी तब तक हमलोग उसे खून देते रहेंगे. गांव के आलमिन मिर्जा कहते हैं कि गांव का एक बच्चा तिल-तिल मौत के करीब पहुंच रहा हो तो कैसे गांववाले चैन से सो सकते हैं. इसलिए हमलोगों ने फैसला लिया है कि जो भी संभव होगा उसकी मदद की जाएगी.

देवघर जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित केचुआबांध गांव मुस्लिम बहुल गांव है. लेकिन अजित की जिंदगी के लिए गांववालों ने मजहब की दीवारें तोड़कर इंसानियत की मिसाल गढ़ने की ठान ली है. गांववाले अजित की मां को अपनी बेटी और बहन मानते हैं. उस पर जो दुखों का पहाड़ टूटा है. उसको सब मिलजुल बांटकर कम करने में लगे हुए हैं. दो साल पहले अजित के पिता की मौत हो गई. तीन भाई-बहनों में छोटी बहन हार्ट की मरीज है. अजित थैलेसेमिया से जुझ रहा है.

मां संजू कहती हैं कि गांववालों के साथ-साथ सरकार से भी अजित के लिए कोई मदद मिल जाती तो उसका इलाज अच्छा से हो पाता. फिलहाल अजित के लिए गांववाले भगवान बने हुए हैं.

(मनीष राज की रिपोर्ट)

 

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First published: June 15, 2018, 1:37 PM IST
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