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गठजोड़ पूजा: दो गुंबदों के बीच बंधती है रज्जू, सिर्फ इस ज्योतिर्लिंग में होती है खास पूजा, जानें मान्यता

शादी होने के तुरंत बाद जोड़े इस मंदिर में जाते हैं और मन्नत मांगते हैं कि उनका वैवाहिक जीवन सुखी, समृद्ध और मंगलमय रहे. ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट – परमजीत कुमार

    देवघर. भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों में से एक देवघर के बैद्यनाथ धाम में है. देश-विदेश से श्रद्धालु यहां साल भर पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मंदिर में पूजा के साथ-साथ कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं. इन्हीं में से एक शिव-पार्वती के गठजोड़ की परंपरा है. इसमें भगवान शिव के मंदिर के गुंबद और मंदिर परिसर में ही स्थापित माता पार्वती के मंदिर के गुंबद के बीच पवित्र लाल धागा बांधा जाता है. इसे स्थानीय बोलचाल की भाषा में गठजोड़वा पूजा भी कहा जाता है.

    यह गठजोड़ परंपरा भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल बैद्यनाथ धाम में है. कई भक्त खास तौर पर गठजोड़ पूजा के लिए ही यहां आते हैं. मान्यता है कि इस अनुष्ठान से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई श्रद्धालु भोलेनाथ से मन्नत पूरी होने पर गठजोड़ पूजा का वादा कर जाते हैं. मनोकामनाएं पूरी होने पर दोबारा आते हैं और शिव-पार्वती गठजोड़ का अनुष्ठान संपन्न करते हैं.

    नवविवाहितों के लिए विशेष है यह पूजा

    ऐसे तो कोई भी श्रद्धालु गठबंधन पूजा कर सकता है, लेकिन दंपति के लिए यह पूजा खास मानी जाती है. मंदिर के तीर्थ पुरोहित बब्बू द्वारी ने न्यूज़ 18 लोकल को बताया कि बैद्यनाथ धाम में शिव-पार्वती का गठबंधन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. खासकर विवाहित जोड़े यह पूजा करते हैं. इससे दांपत्य जीवन सुखमय और खुशहाली से भरा होता है. उन्होंने बताया कि यहां रोजाना करीब 50 की संख्या में गठजोड़ पूजा होती है.

    ऐसे होती है गठजोड़वा पूजा

    यह पूजा मंदिर के तीर्थ पुरोहित कराते हैं. मंदिर के गुंबद पर धागा बांधने का अधिकार देवघर के मल्हारा गांव के राउत समाज के लोगों को ही है. इस समाज का कोई भी शख्स गुंबद में धागा बांध सकता है. पूजा में इस्तेमाल होने वाला लाल रज्जू (पवित्र लाल धागा) मंदिर के आसपास की दुकानों में मिलता है. भक्त इस धागे के साथ पुरोहित से गठजोड़वा पूजा का अनुरोध करते हैं.

    शिव और पार्वती के गुंबद पर दो अलग-अलग शख्स चढ़ते हैं. पहले शिव मंदिर के शिखर पर धागे के एक छोर को बांधा जाता है. फिर धागे के गोले को नीचे गिराते हैं, जिसे भक्त दंपति अपने हाथ में लेकर पार्वती मंदिर तक जाते हैं. फिर पार्वती मंदिर के शिखर पर मौजूद शख्स धागे के दूसरे छोर को गुंबद पर बांध देते हैं. इस तरह गठजोड़वा पूजा संपन्न होती है.

    Tags: Deoghar news, Shiva Temple

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