बाबानगरी देवघर क्यों बनती जा रही साइबर ठगों की नगरी? ये है सबसे बड़ी वजह

देवघर अब बाबानगरी से ज्यादा साइबर ठगों की नगरी के रूप में ज्यादा जाना जाने लगा है.

देवघर अब बाबानगरी से ज्यादा साइबर ठगों की नगरी के रूप में ज्यादा जाना जाने लगा है.

Cyber Crime: देवघर पुलिस की लाश कोशिशों के बावजूद जिले में साइबर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले तीन माह में पुलिस ने 326 साइबर अपराधियों पर कार्रवाई की. लेकिन ठगी का सिलसिला रूक नहीं रहा.

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देवघर. झारखंड का देवघर यूं तो बैद्यनाथ धाम (Baidyanath Dham) को लेकर बाबानगरी के रूप में विश्व प्रसिद्ध है. लेकिन हालिया कुछ सालों इसकी नई पहचान साइबर ठगों (Cyber Crime) की नगरी के रूप में भी सामने आई है. दरअसल देवघर और इससे सटा जामताड़ा जिला साइबर अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है. लाख कोशिशों के बाद भी पुलिस साइबर क्राइम पर लगाम लगाने में सफल साबित नहीं हो रही है. देश का शायद ही कोई राज्य है जहां की पुलिस साइबर अपराधियों की सुराग ढूंढते यहां नहीं पहुंची हो. लेकिन अब अच्छी बात ये है कि देवघर पुलिस द्वारा लगातार इनके खिलाफ अभियान का सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगा है.

देवघर पुलिस द्वारा साइबर अपराध पर अंकुश लगाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. ताबड़तोड़ गिरफ्तारी भी की जा रही है. कांड का उद्भेदन भी हो रहा है. लेकिन जिले में साइबर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले तीन माह से अधिक की अवधि में देवघर पुलिस ने 326 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 7 लाख 76 हज़ार कैश के अलावा 556 मोबाइल फोन, 826 सिमकार्ड, 246 ATM कार्ड, 224 पासबुक, 55 चेकबुक, 13 लैपटॉप, 3 स्वाईप मशीन, 2 POS मशीन, 2 राउटर सहित 38 बाइक और 17 चारपहिया वाहन जब्त किए गये. कई कांडों का उद्भेदन भी हुआ है. ठगी के शिकार लोगों को उनके रकम भी वापस दिलाये गए. लेकिन इन सब के बाबजूद रक्तबीज की तरह इनकी संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है.

आलम यह है कि साइबर अपराधियों की तलाश में देश का शायद ही कोई राज्य बचा है जहां की पुलिस इन साइबर अपराधियों की तलाश में यहां नहीं पहुंची हो. कई पढ़े-लिखे और अच्छे पदों पर कार्यरत लोगों को भी इन लोगों ने पलक झपकते अपना शिकार बना लिया है. इनके द्वारा खास तौर पर बैंक अधिकारी बन कर KYC अपडेट करने के बहाने लोगों को अपने जाल में फंसा लिया जाता है. हैरानी की बात है कि कई नवीनतम आईटी तकनीक का सहारा लेकर इनके द्वारा साइबर अपराध की घटना को अंजाम दिया जा रहा है. हाल-फिलहाल अब वर्चुअल तकनीक का भी इनके द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.

बैंकों के जरिये ठगी करने के लिए कई CSP संचालकों को भी इनके द्वारा अपने गैंग में शामिल किया गया है. कई CSP संचालक तो गिरफ्तार भी किये गए हैं. इसके लिए देवघर पुलिस द्वारा बैंक अधिकारियों के साथ बैठक कर इन CSP संचालकों पर नज़र रखने के निर्देश भी दिए गए हैं.
इन सब के बाबजूद सच तो यह है कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में पुलिस कामयाब नहीं हो पा रही है. इसका बड़ा कारण है कि साइबर अपराध के खिलाफ मौजूदा कानून की नरमी का लाभ इन्हें मिल जा रहा है और अभियोजन की कोशिश के बाद भी पुख्ता सबूत के अभाव में आसानी से ये कानून की गिरफ्त से छूट जा रहे हैं. ऐसे में पुलिसिया प्रयास के साथ इनके खिलाफ कड़े कानून बनाने की भी सख्त जरूरत है, तभी नासूर बन चुके इस साइबर अपराध से छुटकारा मिल सकती है.
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