विश्व गौरैया दिवस: ऐसा क्या हुआ कि देवघर की फिजाओं से गायब हो गईं रंग-बिरंगी चिड़ियां

विश्व में 32 प्रजाति के गौरैया पाये जाते हैं. इनमें से कई अब विलुप्त होने के कगार पर हैं.

विश्व में 32 प्रजाति के गौरैया पाये जाते हैं. इनमें से कई अब विलुप्त होने के कगार पर हैं.

World Sparrow Day: पक्षी विशेषज्ञ रजच मुखर्जी की माने तो पर्यावरण में आई भारी गिरावट के कारण देवघर के आंगन से रंग-बिरंगी चिड़ियां गायब हो गईं.

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देवघर. आज विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) है. इस मौके पर विलुप्त हो रहे गौरैया को लेकर पक्षी विशेषज्ञ चिंतित नजर आ रहे हैं. देवघर और इसके आसपास के क्षेत्रों की विशेष तरह की जलवायु और आवोहवा के कारण सालों भर अलग-अलग समय में गौरैया सहित कई प्रजातियों की छोटी घरेलू चिडियां यहां देखी जाती रही हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है. इनमें से कुछ प्रजातियां तो लगभग लुप्त हो गयी हैं. पक्षी विशेषज्ञ पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के पर्यावरण में तेजी से आई गिरावट को इसका बड़ा कारण मानते हैं.

हाल के वर्षों तक देवघर और इसके आसपास के क्षेत्रों की आवोहवा से प्रभावित होकर झुण्ड की झुण्ड गौरैया और अन्य घरेलू चिडियां यहां आती रही हैं. लेकिन आमतौर पर घर-आंगन और बगानों में देखी जाने वाली ये घरेलू चिड़ियां अब विरले ही देखी जाती हैं.

पक्षी विशेषज्ञ रजच मुखर्जी की माने तो पर्यावरण में आई भारी गिरावट इसका बड़ा कारण है. विश्व में 32 प्रजाति के गौरैया पाए जाते हैं. इनमें से कुछ धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर हैं. हालांकि देवघर में इनमें से कुछ दुर्लभ प्रजाति की रंग-बिरंगी चिड़ियां आज भी गाहे-बगाहे दिख जाती हैं. हालांकि आज की नई पीढ़ी अब इन्हें अपने पाठ्य-पुस्तकों में ही देख पाती है. पक्षी विशेषज्ञ गौरैया सहित अन्य घरेलू पक्षियों को संरक्षित करने की सभी से गुहार लगा रहे हैं.

क्या इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी छोटी चिड़ियां?
घर-आंगन और बागानों में अपना आशियाना बना कर रहने वाली गौरैया और रंग-बिरंगी अन्य घरेलू चिड़ियां की प्रजातियों का तेजी से विलुप्त होना निःसंदेह पर्यावरण में आई गिरावट का बड़ा संकेत है. जरूरत है इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की, अन्यथा इनमें से अधिकांश प्रजातियां इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जायेंगी.
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