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7000 करोड़ के बजट से 53000 परिवार का होना था पुनर्वास, अबतक 3 हजार का ही हो पाया

अभिषेक कुमार | News18 Jharkhand
Updated: March 5, 2019, 6:10 PM IST
7000 करोड़ के बजट से 53000 परिवार का होना था पुनर्वास, अबतक 3 हजार का ही हो पाया
पुनर्वास के बिना कुछ इस दशा में रह रहे हैं झरिया के बस्ताकोला एरिया की दोबारी बस्ती के लोग

अब धनबाद सांसद पीएन सिंह भी वर्तमान झरिया मास्टर प्लान में बदलाव कि सलाह दे रहे हैं. हालांकि उपायुक्त ए दोड्डे ने भी विस्थापितों के पुनर्वास जल्द करने का भरोसा दिया है.

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धनबाद झरिया के बीसीसीएल बस्ताकोला एरिया का दोबारी बस्ती में अक्सर भूमिगत आग प्रभावित होने के कारण भू-धंसान की घटना होती रहती है. जब भी मौसम बदलती है या बारिश होती है, यहां रहने वाले
विस्थापित दहशत में आ जाते हैं. भू धंसान क्षेत्र में रहने वाले रैयत हो या बेघर विस्थापित सभी का जान सांसत में है लेकिन जमीन के बदले जमीन व रोजगार नहीं मिलने से अब तक ये लोग इस जगह को छोड़
जाने को तैयार नहीं हैं. अब तक पुनर्वास नहीं होने से इनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है. महिलाएं, बच्चे सभी रात जाग-जागकर बिताने को मजबूर हैं.

वर्ष 2009 में झरिया मास्टर प्लान बना था. तब करीब 7000 करोड़ की राशि खर्च कर 12 वर्षों में 53 हजार परिवार को पुनर्वासित करने का लक्ष्य था लेकिन अब ये आंकड़ा 95 हजार तक जा पहुंचा है. दिलचस्प बात ये है कि कुछ वर्ष तक पुनर्वास 2004 या 2009 के कट ऑफ डेट में किसके आधार पर हो, इसको लेकर सर्वे का मामला उलझा रहा. हालांकि वर्तमान में 2004 को आधार मानकर सर्वे की जा रही है. ऐसे में पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक जहां अलग से पुनर्वास अधिकारी नियुक्त करने कि मांग कर रहे हैं .

अब धनबाद सांसद पीएन सिंह भी वर्तमान झरिया मास्टर प्लान में बदलाव कि सलाह दे रहे हैं. हालांकि उपायुक्त ए दोड्डे ने भी विस्थापितों के पुनर्वास जल्द करने का भरोसा दिया है. उनके मुताबिक  23 साईट पर सर्वे काम तेजी से चल रहा है.गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी पुनर्वास योजना में शुमार झरिया विस्थापितों के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार बनाया गया.

धनबाद की बेलगड़िया में एक बड़ा टाउनशिप तैयार की गई लेकिन अभी तक मात्र 26 परिवार को ही सुरक्षित पुनर्वास हो पाया है. बीसीसीएल को तो कोयला निकालने के अलावा पुनर्वास कि कोई चिंता ही नहीं. बीसीसीएल भूमिगत अग्नि प्रभावित इलाकों को सिर्फ डेंजर घोषित कर अपना इतिश्री कर लेती है जबकि जिला प्रशासन को इतना समय नहीं कि पुनर्वास पर ध्यान केन्द्रित कर पाए.

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First published: March 5, 2019, 6:10 PM IST
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