100 साल से धधक रहा झारखंड का ये शहर, SC की निगरानी में होगा प्रभावितों का पुनर्वास

शीर्ष अदालत ने एक सदी से ज्यादा समय से जल रहे कोलवरी इलाके की जमीन से प्रभावित निवासियों के बचाव और पुनर्वास की निगरानी का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया है.

News18 Jharkhand
Updated: July 16, 2019, 1:11 PM IST
100 साल से धधक रहा झारखंड का ये शहर, SC की निगरानी में होगा प्रभावितों का पुनर्वास
100 वर्षों से धधक रहा झारखंड, अब SC की निगरानी में होगा प्रभावितों का पुनर्वास (फाइल फोटो)
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Updated: July 16, 2019, 1:11 PM IST
झारखंड के धनबाद जिले के झरिया शहर की धरती बीते 100 वर्षों से धधक रही है. भूमिगत कोयले की आग की वजह से यह शहर लगातार जल रहा है. लेकिन इस समस्या ने अब सुप्रीम कोर्ट का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

बता दें कि कोलवरी इलाके की जमीन 100 सालों से आग से धधक रही है. इसकी वजह से वहां के स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा असर पड़ रहा है.

इस संबंध में वर्ष 1997 से पहले से लंबित मामले को प्राथमिकता देते हुए शीर्ष अदालत ने एक सदी से भी ज्यादा समय से जल रहे घातक विस्फोट से प्रभावित निवासियों के बचाव और पुनर्वास की निगरानी के लिए इसे अपने ऊपर ले लिया है.

सुनवाई में तेजी

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने झरिया कोलफील्ड की भूमिगत आग पर जनहित याचिका की सुनवाई तेजी से की है, जिसने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है और हजारों लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है. वहीं अदालत ने हाल ही में उल्लेख किया है कि धनबाद के खान सुरक्षा महानिदेशक के नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में वर्ष 2009 के बाद से इस मामले में कुछ भी नहीं मिला था.

पुनर्वास के लिए अपने हलफनामे को प्रस्तुत करने का निर्देश

कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपनी कार्रवाई योजना के संदर्भ में उनके द्वारा उठाए गए कदमों का प्रदर्शन करने के लिए वहां के निवासियों के पुनर्वास के लिए अपने हलफनामे को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. 
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कोलफील्ड्स-coalfields
100 वर्षों से धधक रहा झारखंड, अब SC की निगरानी में होगा प्रभावितों का पुनर्वास (फाइल फोटो)


बीते 9 जुलाई को अपनी नवीनतम सुनवाई में पीठ ने सबसे महत्वपूर्ण रूप से दो पहलुओं पर ध्यान दिया. अदालत ने कहा कि "पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों या परिवारों के पुनर्वास के लिए होनी चाहिए, जो भूमिगत आग और उपद्रव से प्रभावित हो सकते हैं." दूसरा, अदालत ने कहा कि हालांकि रिकॉर्ड पर कागजों की अधिकता थी, "जमीनी हकीकत के संबंध में शुद्ध परिणाम स्पष्ट रूप से अनुपस्थित हैं या स्पष्टता की कमी है."

झारखंड में साइटों का होगा दौरा

इस प्रकार पीठ ने कोयला क्षेत्र में गैर-पक्षपातपूर्ण, जमीनी वास्तविकताओं की उद्देश्यपूर्ण तस्वीर प्राप्त करने का निर्णय लिया. साथ ही झारखंड में साइटों का दौरा करने के लिए एमिकस क्यूरिया के वकील गौरव अग्रवाल से अनुरोध किया. अदालत ने कहा कि जमीन पर स्थिति का पहला ज्ञान प्राप्त करने में एमिकस को सक्षम होना चाहिए.

इस पर वकील गौरव अग्रवाल अग्रवाल ने स्पॉट पर जाने और अदालत के आदेश को आगे बढ़ाने के लिए एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए आसानी से सहमति व्यक्त की. 

एमीकस की रिपोर्ट

पीठ ने आगे कहा कि "जबकि सीखा एमिकस क्यूरिया इस मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच करने के लिए स्वतंत्र होगा, उनसे अनुरोध किया जाता है कि वे मुख्य रूप से उन परिवारों की संख्या पर ध्यान केंद्रित करें जो प्रभावित हो रहे हैं." एमीकस की यह रिपोर्ट भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा कवर किए गए क्षेत्रों के संबंध में है. 

बहरहाल, अग्रवाल से 4 सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है, जबकि उसे संतोषजनक तरीके से कार्य पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए अदालत ने भारत सरकार, खान महानिदेशक, बीसीसीएल, ईसीएल, पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्यों के साथ-साथ झरिया पुनर्वास और विकास प्राधिकरण, आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण को सभी सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है. 

मालूम हो कि झरिया कोयला क्षेत्र में पहली आग सन् 1916 में लगी थी. इसकी वजह से ये अज्ञात बनी हुई थी. झरिया भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का स्रोत बना हुआ है, जिससे लोहा और इस्पात उद्योग को समर्थन मिल रहा है. 

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First published: July 16, 2019, 12:48 PM IST
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