16 लाख आबादी के बावजूद धनबाद में पेयजल योजना के लिए पर्याप्त उपभोक्ता नहीं

झारखंड की सबसे अधिक शहरी आबादी वाले धनबाद नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन 16 लाख लोगों की प्यास बुझाने के लिए 245 मिलियन लीटर पानी की आ‌वश्यकता होती है

Abhishek Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 1:00 PM IST
16 लाख आबादी के बावजूद धनबाद में पेयजल योजना के लिए पर्याप्त उपभोक्ता नहीं
धनबाद शहर
Abhishek Kumar
Abhishek Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 1:00 PM IST
धनबाद नगर निगम की शहरी पेय जलापूर्ति योजना के तृतीय फेज का काम लगभग पूरा हो चुका है. निगम की नोडल एजेंसी, पीएचईडी द्वारा शहर में अब तक 36 जलमीनार बनावाये गए हैं. लेकिन इस योजना को चालू रखने के लिए निगम के पास पर्याप्त उपभोक्ता नहीं है. एक तरफ जेएनयूआरएम से करोड़ों खर्च के बाद भी जनता प्यासी है तो दूसरी तरफ बड़े अपार्टमेंट और निजी घरों में अवैध बोरिंग से निगम को हर माह लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है.

झारखंड की सबसे अधिक शहरी आबादी वाले धनबाद नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन 16 लाख लोगों की  प्यास बुझाने के लिए 245 मिलियन लीटर पानी की आ‌वश्यकता होती है. धनबाद शहर को मैथन डैम , तोप चांची झील और जमाडोबा से पानी की सप्लाई होती है. लेकिन जानकार आश्चर्य होगा कि इतने बड़े शहर में निगम के पास मात्र 32 हजार पेयजल उपभोक्ता ही है. जबकि निगम की नोडल एजेंसी पीएचईडी   पेय जलापूर्ति योजना के फेज एक लेकर तीन तक पर करीब 700 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है.

नगर आयुक्त राजीव रंजन के अनुसार निगम को इस फेज थ्री योजना को चालू रखने के लिए करीब डेढ़ लाख नए उपभोक्ता बनाने की आवश्यकता है. इसके लिए जल्द ही निगम के सभी 55 वार्डो में बड़ा कैंप शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि निगम की अनुमति के बगैर अपार्टमेंट और घरों में निजी बोरिंग कराना अवैध है. जांच में पकड़े जाने पर कार्रवाई होगी.

पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता नवरंग सिंह के अनुसार पेयजल आपूर्ति संचालन की जिम्मेवारी निगम को उठाना है. हालांकि पिछले पांच वर्ष में भी निगम और पीएचईडी संयुक्त रूप से जरूरत के मुताबिक उपभोक्ता नहीं बना सके हैं.

गौरतलब है कि धनबाद के कोलियरी क्षेत्रों में बीसीसीएल बड़ी बेदर्दी से 3 लाख 40 हजार 120 गैलेन पानी प्रतिदिन बहा रही है. अगर इस पानी का इस्तेमाल पीने के लिए किया जाता तो शहर में पेय जल संकट का समाधान हो जाता. यही कारण है कि सीएम रघुवर दास की पहल पर कोल इंडिया और राज्य सरकार के बीच एमओयू किया गया, जिसके तहत धनबाद नगर निगम के 36 स्थानों पर कोयला खदानों के वेस्ट वॉटर को ट्रीटमेंट प्लांट के जरिय पीने लायक बनाकर घर-घर तक पहुंचाई जाएगी.

धनबाद उपायुक्त ए दोड्डे के अनुसार गर्मी में लोगो को पेयजल संकट नहीं हो, इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है. धनबाद के निरसा, बाघमारा, सिंदरी सहित पूरे शहर में पेयजल आपूर्ति योजना को पहली प्राथमिकता दी गयी है. इस पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं.

 
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