पीएमसीएच में बाहर से दवाएं खरीदने का मजबूर मरीज
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पीएमसीएच में बाहर से दवाएं खरीदने का मजबूर मरीज
सूबे का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है धनबाद का पीएमसीएच. लेकिन यहाँ मरीजों को मामूली दवा भी नहीं मिल पा रही है. चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही लगभग 90 फीसदी से ज्यादा दवाई मरीजों को अस्पताल से बाहर खरीदनी पड़ रही है.

सूबे का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है धनबाद का पीएमसीएच. लेकिन यहाँ मरीजों को मामूली दवा भी नहीं मिल पा रही है. चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही लगभग 90 फीसदी से ज्यादा दवाई मरीजों को अस्पताल से बाहर खरीदनी पड़ रही है.

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सूबे का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है धनबाद का पीएमसीएच. लेकिन यहाँ मरीजों को मामूली दवा भी नहीं मिल पा रही है. चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही लगभग 90 फीसदी से ज्यादा दवाई मरीजों को अस्पताल से बाहर खरीदनी पड़ रही है.
मात्र 26 तरह की दवाएं उपलब्ध
गिरिडीह, देवघर,जामताड़ा, सहित आसपास के इलाकों से यहाँ सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं. लेकिन पीएमसीएच धनबाद में इन दिनों इलाज कराने आने वाले गरीब मरीज को नाम मात्र का भी दवा नहीं मिल पा रही है . नतीजा धनबाद और आस पास के जिलों से आये गरीब मरीजों का बुरा हाल है. जब ई.टीवी /प्रदेश 18 की टीम ने पीएमसीएच अस्पताल का जायजा लिया तो पाया कि सिर्फ 26 प्रकार की दवाएं ही अस्पताल में है.
प्यास लगने पर खोदा कुआं
दवाओं की कमी को देखते हुए पीएमसीएच अधीक्षक आर.के.पांडेय ने 1 करोड़ 07 लाख रूपये की दवाओं की ख़रीदारी के लिए टेंडर निकाला है. हालांकि ये टेंडर भी जून महीने तक पूरा होगा. मतलब प्यास लगने पर कुंआ खोदने वाले कहावत चरितार्थ कर रहा है पीएमसीएच प्रबंधन. मतलब साफ है कि टेंडर की प्रत्याशा में गरीब मरीज को अगले एक महीने दवा के बगैर ही इलाज कराना होगा पीएमसीएच में. सवाल ये है कि दवा की आपूर्ति समय पर नहीं होने के लिए ज़िम्मेवार कौन.
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