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गुजरात की कंपनी ने झारखंड के 13 मजदूरों को बनाया बंधक, छोड़ने के एवज में 25 हजार रुपये मांगने का आरोप

गुजरात की कंपनी ने झारखंड के 13 मजदूरों को बनाया बंधक, छोड़ने के एवज में 25 हजार रुपये मांगने का आरोप

Dhanbad News: समाजसेवी अंकित राजगढ़िया की कोशिशों के बाद झारखंड के मजदूरों को मुक्‍त कराया जा सका. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Dhanbad News: समाजसेवी अंकित राजगढ़िया की कोशिशों के बाद झारखंड के मजदूरों को मुक्‍त कराया जा सका. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Jharkhand News: झारखंड के मजदूरों को 15 हजार के वेतन का झांसा देकर राजकोट स्थित एक मार्बल कंपनी में ले जाया गया था. मजदूरों का आरोप है कि फैक्‍ट्री में न केवल उनसे जबरन काम कराया जाता था, बल्कि उनके साथ्‍ज्ञ मारपीट भी की जाती थी. सरकारी हस्‍तक्षेप के बाद मुक्‍त हुए मजदूरों का कहना है कि छोड़ने के एवज में उनसे 25-25 हजार रुपये मांगे जा रहे थे. ये सभी मजदूर धनबाद और बोकारो के रहने वाले हैं.

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    संजय गुप्‍ता

    धनबाद. गुजरात के राजकोट में बंधक बनाए गए झारखंड के सभी 13 मजदूरों को छुड़ा लिया गया है. दिवाली से पहले इनकी सकुशल घर वापसी भी हो गई है. ये सभी मजदूर मुंबई मेल एक्सप्रेस से धनबाद पहुंचे. झारखंड सरकार के हस्‍तक्षेप के बाद इन मजदूरों को छोड़ा गया. ट्रेन में टिकट बुक न होने की वजह से इन्‍हें परेशानियों का सामना करना पड़ा. राजकोट में दर्जनभर से ज्‍यादा मजदूरों को बंधक बनाए जाने की घटना को सरकार के स्‍तर पर गंभीरता से लिया गया और उन्‍हें मुक्‍त कराने की पहल शुरू की गई थी. सरकार के हस्‍तक्षेप के बाद इन मजदूरों की घर वापसी संभव हो सकी.

    दरअसल, गुजरात के राजकोट में स्थित ब्रेजा टाइल्स कंपनी मोरगी ने बोकारो और धनबाद के 13 मजदूरों को बंधक बना लिया था. सभी बोकारो जिला के गोरमारा और धनबाद के रहने वाले हैं. मजदूरों की सकुशल वापसी में समाजसेवी अंकित राजगढ़िया की भी भूमिका अहम रही. रेस्क्यू किए गए मजदूरों में गोरमारा के गुड्डू कुमार सिंह नामक मजदूर ने बताया मार्बल फैक्ट्री में उनसे जबरन काम लिया जा रहा था. छुट्टी और वेतन की मांग करने पर मारा-पीटा जाता था. घर वापसी के लिए उल्टे 25 हजार रु देने का भी दबाव बनाया जा रहा था.

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     गुड्डू ने बताया कि उन्‍हें मनोज और राजू नामक शख्‍स हर महीने 15 हजार रुपये वेतन का झांसा देकर 30 सितंबर को राजकोट स्थित ब्रेजा टाइल्स कंपनी में लेकर गया था. वहां पहुंचने पर सभी को बंधक बना लिया गया. उनसे जबरन काम लिया जाने लगा. सभी 13 मजदूरों को प्रताड़ित किया जाता था. उन्‍होंने बताया कि कंपनी से छूटने के बाद वे लोग बिना टिकट के ही ट्रेन में सवार हो गए थे. इससे उन्‍हें अपने प्रदेश लौटने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

    अंकित राजगढ़िया ने बताया कि उन्हें कुछ लोगों के माध्यम से 13 मजदूरों के राजकोट में एक मार्बल फैक्ट्री में फंसे होने की जानकारी मिली थी. इसके बाद उन्होंने तत्काल मंत्री चंपई सोरेन को ट्वीट कर मामले से अवगत कराया. ट्वीट पर चंपई सोरेन एवं श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने स्वतः संज्ञान लिया, जिसके बाद बोकारो जिला के प्रशासन को मजदूरों का रेस्क्यू करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद मजदूरों की सकुशल वापसी की प्रक्रिया शुरू की गई.

    अंकित ने बताया कि राजकोट प्रशासन के सहयोग से सभी मजदूरों को रेस्क्यू कर फैक्ट्री से निकाल लिया गया. अंकित ने सरकार और प्रशासन के पहल का स्‍वागत किया. साथ ही कहा कि मजदूरों के राजकोट से धनबाद आने तक की कोई व्यवस्था न किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. मजदूरों के पास ट्रेन का किराया तक नहीं था. सफर के दौरान टीटीई ने मजदूरों को पकड़ा तो उन्‍होंने टीटीई की अंकित से बात कराई.

    Tags: Bokaro news, Dhanbad news, Jharkhand news

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