धनबाद: पाई-पाई को मोहताज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी, ट्रेनिंग देकर कर रहा गुजारा

विशाल पंडित का कहना है कि उन जैसे खिलाड़ियों की मदद के लिए सरकार को आगे आना चाहिए.

Dhanbad News: 2013 में एक चैंपियनशिप के दौरान विशाल के दाहिने हाथ में चोट लग गया. जिसके बाद हाथ ने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद उनका पैराओलंपिक में चयन हुआ. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण हिस्सा नहीं ले पाये.

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    रिपोर्ट- संजय गुप्ता

    धनबाद. झारखंड में न जाने कब खेल और खिलाड़ियों की कदर होगी. खेल में निपुण खिलाड़ी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. राज्य व राष्टीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने वाले खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने इसलिये नहीं जा पा रहे, क्योंकि जाने के लिये पैसे नहीं होते हैं. सरकार, खेल विभाग से मदद की गुहार लगायी जाती है, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिलती. फिर भी खिलाड़ी का मनोबल नहीं टूटा. अब वह युवाओं को ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि वे बड़ा खिलाड़ी बनकर अपने गुरु का नाम रौशन करे. बात धनबाद के भूली बस्ती में रहने वाले विशाल पंडित की कर रहे हैं.

    अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी (International Taekwondo Player) विशाल पंडित आज किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं. 2013 में एक चैंपियनशिप के दौरान उनके दाहिने हाथ में चोट लग गया. जिसके बाद हाथ ने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद उनका पैराओलंपिक में चयन हुआ. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण हिस्सा नहीं ले पाये. विशाल आज किसी तरह ट्रेनिंग सेंटर चलाकर गुजारा कर रहे हैं. हालांकि कोरोना महामारी के चलते सेंटर भी पिछले साल से बंद है. जिससे उनकी स्थिति और दयनीय हो गई.

    विशाल के पिता दिहाड़ी मजदूर का काम करते थे. लेकिन पैर में चोट एक दुर्घटना में लग गया. जिसके बाद से वह भी बेरोजगार हो गये. विशाल ने बताया कि उनका चयन 4 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली कोरियो मार्शल आर्ट की ताइक्वांडो प्रतियोगिता के लिए हुआ. लेकिन वह उस प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाये. गरीबी और सरकार की उदासीनता के कारण वह प्रतियोगिता में अपना दम नहीं दिखा पाये.

    विशाल पंडित राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कई प्रतियोगिताओं में मेडल और पुरस्कार जीत चुके हैं. दाहिने हाथ में चोट लगने के बाद विशाल ने पारा ताइक्वांडो में कोशिश की. पारा ताइक्वांडो के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतिस्पर्धा में उसका चयन हुआ. अमेरिका, जॉर्डन, इजिप्ट और भारत के हैदराबाद में होने वाली प्रतिस्पर्धा में विशाल को शामिल होना था. लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह हिस्सा नहीं ले पाये.

    विशाल के पिता संजय पंडित कहते हैं कि बेटे के अंदर शुरू से ही प्रतिभा थी. हमें उसके लिए जितना करना चाहिए था, हमने किया. अब सरकार को भी थोड़ी पहल करने की जरूरत है.

    समाजसेवी जितेंद्र कुमार ने कहा कि विशाल की प्रतिभा को निखारने के लिए सरकार को भी आगे आकर मदद करनी चाहिए. ताकि इनके परिवार का भी हौसला बढ़े. सरकार को ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की एक सूची तैयार करनी चाहिए. और खिलाड़ियों को मदद देनी चाहिए.

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