मायानगरी में छाए धनबाद के जितेंद्र सिंह तोमर, ऐसा है कामयाबी का सफर

जीतेंद्र ने अपना करियर सोनी टीवी के लोकप्रिय शो अदालत से बतौर सहायक निर्देशक के रूप में शुरू किया था,

जीतेंद्र ने अपना करियर सोनी टीवी के लोकप्रिय शो अदालत से बतौर सहायक निर्देशक के रूप में शुरू किया था,

धनबाद जैसे छोटे से शहर से निकलकर मुंबई जैसी सपनों की नगरी में पहचान बनाना आसान नहीं होता. जीतेंद्र ने कड़ी मेहनत और जुनून के बल पर वो सफर न सिर्फ पूरा किया. बल्कि अपनी पहचान बना कर दिखा दिया कि हार के बाद जीत तय है.

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निलेश निलयम. 

धनबाद. साल 2008 की बात है, जब मुंबई में 'तारक मेहता..' के पहले सीजन की शूटिंग शुरू हुई थी. उस समय किसी को यकीन नहीं था कि ये सीरियल देशभर में इतना सराहा जाएगा. लेकिन जैसे-जैसे नए-नए एपीसोड TV पर आते गए, दर्शकों के दिलोदिमाग पर छाते गए. दर्शकों ने भी जेठालाल पर खूब प्यार

बरसाया. इस शो ने छोटे पर्दे के कई कलाकारों को बड़ी पहचान तो दिलाई ही. बतौर सहायक निर्देशक धनबाद के टैलेंटेड जीतेंद्र सिंह तोमर ने भी मायानगरी का दिल जीत लिया. जीतेंद्र ने अपना करियर सोनी टीवी के लोकप्रिय शो अदालत से बतौर सहायक निर्देशक के रूप में शुरू किया था, जहां उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला. फिर मशहूर धार्मिक सीरियल देवों के देव महादेव में भी उन्होंने सहायक निर्देशक के रूप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. इसके बाद ही उन्हें टीवी सीरियल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में काम करने का मौक़ा मिला. फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

सोनी और सब टीवी से लेकर कई नेशनल चैनल्स के लिए उन्होंने एक से बढ़कर एक सीरियल किए. फिर अचानक उनके कैरियर में नया मोड़ तब आया जब उन्होंने खुद बॉलीवुड में बतौर निर्माता और निर्देशक के रूप में पहचान बनाने की ठानी. जेएसटी फिल्म्स के नाम से प्रोडक्शन हाउस शुरू किया. और वो दिन भी आया जब इस प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले फिल्माए गए विडियो सॉन्ग को शेमारू जैसी मशहूर म्यूजिक कंपनी ने रिलीज किया. फिर तो ये सिलसिला चलता रहा. जी म्यूजिक से लेकर वॉल्यूम और B4U से लेकर कई बड़े म्यूजिक लेबल ने उनके गानों को संगीत प्रेमियों के बीच तो रिलीज किया ही. कई उभरते कलाकारों को भी पहचान बनाने का मौका मिला. जल्द ही 'दिल की ख्वाहिशें' नामक एक और विडियो एलबम भी म्यूजिक B4U रिलीज करने जा रही है.
ग्रेजुएशन के बाद तय किया मुंबई का सफर  

धनबाद जैसे छोटे से शहर से निकलकर मुंबई जैसी सपनों की नगरी में पहचान बनाना आसान नहीं होता. जीतेंद्र ने कड़ी मेहनत और जुनून के बल पर वो सफर न सिर्फ पूरा किया. बल्कि अपनी पहचान बना कर दिखा दिया कि हार के बाद जीत तय है. धनबाद शहर के मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए जीतेंद्र ने शुरुआती पढ़ाई-लिखाई धनबाद के स्कूल से की. फिर दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए हजारीबाग चले गए लेकिन अभिनय और निर्देशन हमेशा से उनका पहला प्यार था. स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई-लिखाई के दौरान उन्होंने कई स्टेज शो किए. ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की फिर एक दिन अचानक तय किया कि मुंबई जाना है और अपने सपनों को पूरा करना है. आखिरकार माता-पिता ने उनका साथ दिया और मुंबई की ट्रेन पकड़कर जीतेंद्र निकल पड़े अपने सपनों को पूरा करने. सपनों की नगरी में अपने सपने सच करना इतना आसान नहीं होता. जीतेंद्र को पहले दिन से ही पता चल गया था. कई प्रोडक्शन हाउस का चक्कर लगाने के बाद असफलता हाथ लगी.

ऐसे मिला मौका



हर दिन बोरीवली से निकलते, कभी मलाड की खाक छानते तो कभी अंधेरी में सीरियल और फिल्म के निर्माता और निर्देशकों की गलियों में भटकते रहते. फिर एक दिन वो कांदिवली में एक सीरियल के सेट पर पहुंचे. पहले तो सिक्योरिटी गार्ड ने अंदर जाने नहीं दिया लेकिन वो हार नहीं माने. हर दिन आते और दरवाजा खटखटाते. आखिरकार एक दिन गार्ड का दिल पसीजा और उसने अंदर जाने दिया. इसके बाद उन्हें उसी सीरियल में इस शर्त पर काम मिला कि पैसे नहीं मिलेंगे. लेकिन सीखने का जुनून ऐसा था कि वो उस सीरियल पर दिन-भर भाग-दौड़ करते रहे. शूटिंग और प्रोडक्शन की एक-एक बारीकी समझते गए और इस तरह से उनके निर्देशन कैरियर का आगाज हुआ.

जीतेंद्र सिंह तोमर का एक सपना तो पूरा हुआ फ़िल्मी दुनिया में आने का. लेकिन उनका दूसरा सपना अब भी अधूरा है. और वो है जन्म भूमि झारखंड में बड़े कलाकारों के साथ बॉलीवुड की फीचर फिल्म की शूटिंग शुरू करना. वो अपने इस सपने के भी बेहद करीब पहुंच गए थे. सब कुछ तय हो गया था. लेकिन तभी कोरोना महामारी ने तांडव मचा दिया. लेकिन अब भी ये सपना उन्हें सोने नहीं दे रहा. इंतजार है, तो बस महामारी के खात्मे का. जब वो अपनी पूरी टीम के साथ अपनी जन्मभूमि पहुंचें और लाइट, कैमरा और एक्शन के साथ उस सपने को अंजाम दें.

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