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निरसा विधानसभा क्षेत्र: 35 साल से है मासस का कब्जा, बीजेपी को कभी नहीं मिली जीत

News18 Jharkhand
Updated: December 23, 2019, 7:16 AM IST
निरसा विधानसभा क्षेत्र: 35 साल से है मासस का कब्जा, बीजेपी को कभी नहीं मिली जीत
निरसा विधानसभा सीट पर बीजेपी को कभी जीत नहीं मिली

वर्तमान विधायक सह मासस प्रत्याशी अरूप चटर्जी (Arup Chatterjee) का दावा है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए कई काम किए हैं और आगे भी विकास का काम जारी रखेंगे.

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धनबाद. झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित धनबाद के निरसा विधानसभा क्षेत्र (Nirsa Assembly Constituency) में इस बार तिकोना चुनावी मुकाबला देखने को मिला. यहां आठ प्रत्याशी मैदान में हैं और सभी के जीत को लेकर अपने- अपने दावे हैं. लेकिन मुख्य मुकाबला मार्क्सवादी कोर्डिनेशन कमिटी (मासस), भाजपा और जेएमएम में है.

निरसा को माना जाता है 'लाल गढ़'
निरसा विधानसभा क्षेत्र में पुराने मुद्दों को लेकर पुराने प्रतिद्वंद्वी एक बार फिर मैदान में है. वर्ष 1952 से लेकर अब तक वामदल के प्रत्याशी यहां से विधायक बनते रहे हैं. मौजूदा विधायक अरूप चटर्जी यहां से लगातार तीन बार विधानसभा पहुंचे हैं. उनके पिता दिवंगत गुरुदास चटर्जी भी यहाँ के विधायक रहे. लेकिन 35 वर्षो से वामदल का गढ़ रहने के बावजूद निरसा में कई समस्याओं को अब तक दूर नहीं किया गया है. केएमसीएल, हार्डकोक सहित कई पुराने उद्योग बंद पड़े हैं. 10 वर्ष से बरबेंदिया पुल का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है. पिछले दो वर्ष से कुमारदुभी ओवर ब्रिज के निर्माण की गति कछुआ चाल जैली है. मैथन व पंचेत डैम के रहते इलाके को लोगों को पेयजल के संकट से जुझना पड़ा है. रोजगार के अभाव में लोग पलायन करने को विवश हैं.

हालांकि वर्तमान विधायक सह मासस प्रत्याशी अरूप चटर्जी का दावा है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए कई काम किए हैं और आगे भी विकास का काम जारी रखेंगे. प्रचार में जुटे अरूप चटर्जी का मानना है कि इस बार भी उनकी लड़ाई भाजपा से ही है. भाजपा के भीतरघात का फायदा उन्हें मिलेगा.

मासस विधायक अरूप चटर्जी लगातार तीन बार से जीतते रहे हैं
मासस विधायक अरूप चटर्जी लगातार तीन बार से जीतते रहे हैं


जेएमएम ने मुकाबले को बनाया तिकोना

गांव-गांव जाकर चुनाव प्रचार में जुटीं भाजपा प्रत्याशी अपर्णा सेन गुप्ता को बड़ी जिम्मेवारी मिली है. 2015 में अपर्णा भाजपा में शामिल हुई थीं. 2014 के चुनाव में मात्र 1035 वोट से हारने वाले गणेश मिश्रा का टिकट काटकर भाजपा ने अपर्णा सेन गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है. अपर्णा 2005 में अपने पति सुशांतो सेन गुप्ता की पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक से चुनाव जीत कर मंत्री रह चुकी हैं. हालांकि निरसा विधानसभा सीट पर कभी भाजपा को जीत नहीं मिली है. लेकिन अपर्णा सेन गुप्ता का दावा है कि ये लड़ाई विनाश बनाम विकास की है, जिसमें उन्हें जीत मिलेगी.
मंत्री रह चुकी हैं बीजेपी प्रत्याशी अपर्णा सेन गुप्ता
मंत्री रह चुकी हैं बीजेपी प्रत्याशी अपर्णा सेन गुप्ता


मजेदार बात ये है कि निरसा की लड़ाई को जेएमएम के अशोक मंडल ने तिकोना बना दिया है. अशोक मंडल लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव हारते रहे हैं, लेकिन हौसला पस्त नहीं हुआ है. अशोक मंडल का दावा है कि इस बार जनता बदलाव के लिए वोट करेगी.

धनबाद के निरसा में कुल 3,03,239 मतदाता हैं. यहां बंगाली मतदाता के अलावा बिहारी वोटर्स और अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक वोटर्स माने जाते हैं. निरसा सीट पर चौथे चरण में 16 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे.

(रिपोर्ट- अभिषेक कुमार)

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First published: December 6, 2019, 12:15 PM IST
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