यहां रोगों से बचने के लिए खाई जाती है लाल चींटी की चटनी

धनबाद के भीठा गांव में अदिवासी कोड़ा समाज अपने पारंपरिक भोजन व चिकित्सा के लिए जंगली लाल चींटियों का उपयोग करते हैं.

अभिषेक कुमार | News18 Jharkhand
Updated: September 10, 2019, 9:30 AM IST
यहां रोगों से बचने के लिए खाई जाती है लाल चींटी की चटनी
धनबाद के आदिवासी गांव में खायी जाती हैं लाल चींटियां
अभिषेक कुमार | News18 Jharkhand
Updated: September 10, 2019, 9:30 AM IST
धनबाद. चींटियों को देखकर भले ही देश के बाकी हिस्सों में लोग नाक, भौंहे सिकोड़ते हों, लेकिन झारखंड(Jharkhand) के धनबाद में आदिवासी(Tribal )कोड़ा समाज बड़े ही चाव से लाल चींटियों (Red Ant) को खाते हैं. आदिवासी मान्यताओं के अनुसार बेमौत कही जाने वाली इन चींटियों के सेवन (Use of Red Ants) से कई बीमारियां दूर होती हैं.

पारंपरिक भोजन में लाल चींटियों का करते हैं उपयोग

धनबाद(Dhanbad) जिला मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल रंगीनी भीठा गांव में कोड़ा समाज के लोग रहते हैं.  वैसे तो ये गांव भी अन्य आदिवासी गांव की तरह है, लेकिन एक बात ज़रा हट के है. यहां अदिवासी कोड़ा समाज अपने पारंपरिक भोजन व चिकित्सा के लिए जंगली लाल चींटियों का उपयोग करते हैं. आदिवासी समाज के लोगों का मानना है इसके अंदर औषधीय गुण मौजूद हैं, जो शरीर को प्रतिरोधक की क्षमता विकसित करता है और प्रोटीन देता है.



बुखार को उतारने के लिए चींटियों से कटवाया जाता है 

आदिवासी कोड़ा समाज के युवक सुरेश के अनुसार इसके सेवन से सर्दी खांसी बुखार व मलेरिया तक ठीक हो जाते है. सुरेश ने बताया कि लाल चींटियों व उनके अंडों को इकट्ठा करना, पीसना और नमक मिर्च के साथ चटपटी चटनी तैयार करना इतना आसान नहीं है. आमतौर पर जंगल में नीम जामुन, आम ,करंज के पेड़ में इन बेमौत लाल चींटियां  पाई जाती है.  कोड़ा समाज के अनुसार यदि किसी को बुखार हो जाए तो उसे उतारने के लिए चींटियों से कटवाया जाता है. हालांकि आदिवासी समाज की युवा पीढ़ी इसके उपयोग को भूलकर आधुनिक दवा और भोजन पर ज्यादा भरोसा करती है.

लाल चींटियों की चटनी बनाता आदिवासी युवक
सिल बट्टे पर पीसी जा रही लाल चींटियों की चटनी

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कई देशों में प्रोटीन के लिए किया जाता है लाल चींटियों का इस्तेमाल

चिकित्सकों का मानना है कि भारत के दूसरे हिस्से में भले ही इसका सेवन नहीं किया जाता हो, लेकिन एशिया, अफ्रीका, चीन, ताईवान, कोरिया और दक्षिण अफ्रीका में इन चींटियों का इस्तेमाल प्रोटीन के लिए किया जाता है. आईएमए के चिकित्सक डॉ सुशील कुमार सिंह का कहना है कि ये चींटियां जहरीली नहीं है. ऐसे में शरीर को इससे नुकसान नहीं होता है, लेकिन इसके फ़ायदे को लेकर शोध की ज़रूरत है.

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First published: September 10, 2019, 8:42 AM IST
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