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पीएमसीएच पर लगा डिलेवरी के बाद बच्चा बदलने का आरोप, परिजनों का हंगामा

धनबाद : अस्पताल में गुस्साए परिजनों का हंगामा
धनबाद : अस्पताल में गुस्साए परिजनों का हंगामा

डॉ॰ उर्मिला सिंह ने कहा कि गर्भवती महिला को लड़की ही हुई है. लड़का होने की बात बेबुनियाद है. परिजनों का आरोप निराधार है. उन्होंने अपने दावे में यह भी कहा कि परिजन जन्मी बच्ची का डीएनए करा लें.

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धनबाद पीएमसीएच में बुधवार को बच्चा बदले जाने का मामला प्रकाश में आया. परिजनों का आरोप है कि डिलेवरी में लड़के का जन्म हुआ था जबकि पीएमसीएच के नर्सो द्वारा बच्चा बदलकर बच्ची
थमा दिया गया. अस्पताल प्रबंधन की इसमें सरासर लापरवाही है. यह आरोप लगाकर मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ हंगामा किया. अस्पताल के चिकित्सक हंगामे को शांत कराने के प्रयास में जुटे रहे. मामला बिगड़ता देख पीएमसीएच में तैनात सुरक्षा गार्ड बुला लिया गया. चिकित्सकों ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद ठहराया.

बताया जा रहा है कि दुहाटांड़ के रहने वाले विकास दास ने अपनी गर्भवती पत्नी लक्ष्मी देवी को पेट में तेज दर्द उठने के बाद सुबह में पीएमसीएच में भर्ती कराया था. महिला को गायनी वार्ड में भर्ती कराया गया.
इसके बाद प्रसूति के लिए लेबर रूम में शिफ्ट किया गया. चिकित्सकों की देखरेख में डिलेवरी हुई. महिला का पति विकास महतो का कहना है कि उसकी पत्नी को लड़का हुआ इसकी जानकारी वार्ड की ही एक नर्स ने डिलेवरी के तीन घंटे बाद आकर दी. इस खुशी में उसने नर्स को 500 रुपये बतौर सगुन भी दिया. मगर फिर दो घंटे के बाद नर्स ने आकर बताया कि उन्हें लड़का नहीं बल्कि लड़की हुई है.
विकास का यह भी कहना है कि ऑपरेशन के वक्त लक्ष्मी ने जब लड़के को जन्म दिया तब उनकी मौसी ने देखा था. विकास की मौसी ने आरोप लगाया की बच्चे को नहलाने के लिए तीन बार साबुन मंगाया गया. इसी दौरान बच्चे को बदल दिया गया. परिजनों की माने तो अस्पताल प्रबंधन ने एक साजिश के तहत बच्चा बदलने का काम किया है.



इधर गायनी की चिकित्सक डॉ॰ उर्मिला सिंह ने कहा कि गर्भवती महिला को लड़की ही हुई है. लड़का होने की बात बेबुनियाद है. परिजनों का आरोप निराधार है. उन्होंने अपने दावे में यह भी कहा कि परिजन जन्मी बच्ची का डीएनए करा लें. डॉ॰ उर्मिला सिंह ने एक आरोप परिजनों पर भी लगाया कि लिंग जांच गैर कानूनी होने के बावजूद गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की लिंग जांच करवाई गई है. मरीज ने खुद ही इस बात को स्वीकार किया है. अगर ऐसा है तो पहले परिजन पर ही मामला बनता है.फिलहाल परिजन ने अपने लड़के के बजाय लड़की लेने से साफ इंकार कर दिया है.

वहीं पूरे मामले पर गायनी विभाग की एचओडी डॉ॰प्रतिभा राय ने भी आरोप को बेबुनियाद बताया है. साथ में कहा कि जन्म से पहले लिंग परीक्षण में परिजनों को लड़का होने की बात कही गई है. लेकिन लिंग परीक्षण कानून अपराध है. उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत स्थानीय थाने में की जाएगी. साथ ही कहा कि परिजन बताएं कि जिसने भी लड़का होने की खबर दी है उसे नौकरी से सस्पेंड किया जाएगा. फिलहाल नवजात बच्ची पीएमसीएच में है. अब देखा जाना है कि दूधमुही बच्ची का आखिर क्या होता है.
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