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धनबाद रेल मंडल का अतिक्रमण हटाओ अभियान, एक पखवाड़े में 700 दुकान व मकान तोड़ दिए

News18 Jharkhand
Updated: February 15, 2020, 1:46 PM IST
धनबाद रेल मंडल का अतिक्रमण हटाओ अभियान, एक पखवाड़े में 700 दुकान व मकान तोड़ दिए
किसी के सिर से आशियाना उजड़ गया है तो कोई मासूम अपने टूटे हुए घर में स्कूल की कलम-कॉपी व बस्ता ढूंढ रहा है.

गोमो (Gomo) में अतिक्रमण (Removing encroachment) हटाओ अभियान के तहत महज एक पखवाड़े में 700 दुकान व मकान तोड़ दिए गए. बिना पुनर्वास की व्यवस्था (Rehabilitation) किए दुकान तोड़े जाने से नाराज व्यवसायियों ने धनबाद रेल मंडल के खिलाफ आंदोलन (Agitation against railway) करने की घोषणा की है.

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धनबाद. गोमो (Gomo) में अतिक्रमण (Removing encroachment) हटाओ अभियान के तहत महज एक पखवाड़े में 700 दुकान व मकान तोड़ दिए गए. बिना पुनर्वास की व्यवस्था (Rehabilitation) किए दुकान तोड़े जाने से नाराज व्यवसायियों ने रेलवे के खिलाफ आंदोलन (Agitation against railway) करने की घोषणा की है. पीड़ितों ने सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren), धनबाद डीआरएम सहित विधायक और सांसद से रोते बिलखते हुए कहा- साहब हमारी रोजी रोटी बचा लीजिए. रोजी रोटी की चिंता में घर के पुरुष व महिलाओं के रातों की नींद उड़ गई है. बताया जाता है कि 10 दिन पहले ही इन्हें घर व जमीन खाली करने की नोटिस दी गई और फिर बिना वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए, इन सभी को आरपीएफ के सहयोग से जबरन हटा दिया गया.

अतिक्रमण हटाओ अभियान की वजह से 5 हजार परिवार सड़क पर

धनबाद जैसे औद्योगिक शहर में एक तरफ जहां लोग बेरोजगारी व पलायन की समस्या से लोग जूझ रहे हैं, वहीं धनबाद रेल मंडल ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर गोमो स्टेशन के पास करीब 01 किलोमीटर के दायरे में करीब 700 दुकान व मकान तोड़ दिए. जिस सदानंद झा मार्केट व जगजीवन नगर मार्केट को 74 साल पहले खुद रेलवे प्रबंधन ने बसाया और वर्ष 2017 तक उन दुकानदारों से लीज के शर्त के अनुसार भाड़ा वसूला, अब उन्हीं दुकानदारों को अवैध अतिक्रमणकारी बताकर उनके दुकानों पर जेसीबी व बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया जा रहा है. अतिक्रमण हटाओ अभियान की वजह से 5 हजार परिवार सड़क पर आ गया है. किसी के सिर से आशियाना उजड़ गया है तो कोई मासूम अपने टूटे हुए घर में स्कूल की कलम-कॉपी व बस्ता ढूंढ रहा है.

सदानंद झा मार्केट व जगजीवन नगर मार्केट को 74 साल पहले खुद रेलवे प्रबंधन ने बसाया था.


पीड़ित खुले आसमान में जीवन यापन करने को मजबूर हुए

बता दें कि गोमो स्टेशन वही ऐतिहासिक स्थल है जहां नेता जी सुभाष चंद्रबोस विदेश गमन से पहले आखिरी बार यहीं से ट्रेन पकड़े थे. यहां कई ऐसे परिवार की महिलाएं व वृद्ध भी मिले जिन्हें समान निकालने का भी समय नहीं दिया गया और इस ठंड के मौसम में पीपल पेड़ के नीचे खुले आसमान में जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं. रेलवे के अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ धनबाद का गोमो चैंबर, जिला चैंबर और जिटा ने आंदोलन की घोषणा कर दी है. झारखंड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन के महासचिव राजीव शर्मा के अनुसार शहीद सदानंद झा मार्केट व स्व. जगजीवन राम मार्केट का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में उन्होंने जानना चाहा कि रेलवे मनमानी क्यों कर रही है.

धनबाद रेल मंडल के फैसले को गलत बताया

पीड़ितों ने सीएम हेमंत सोरेन के साथ ही स्थानीय गिरिडीह सांसद व टुंडी विधायक से भी मदद की गुहार लगाई है. वहीं ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल के स्थानीय रेल कर्मियों ने भी विस्थापितों के आंदोलन में अपना समर्थन देते हुए धनबाद रेल मंडल के फैसले को गलत बताया है.

झारखंड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन के महासचिव राजीव शर्मा के अनुसार शहीद सदानंद झा मार्केट व स्व. जगजीवन राम मार्केट का मामला न्यायालय में विचाराधीन है.


विस्थापितों को पहल करनी पड़ेगी

इधर धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि रेलवे अपनी जमीन से अवैध कबजाधारियों को हटाने के लिए धनबाद व गोमो में अतिक्रमण हटाओ अभियान चला रही है. गोमो के पीड़ित विस्थापित के पुनर्वास की व्यवस्था करना रेलवे की जवाबदेही नहीं है. वहीं आवंटित दुकानदारों को बेदखल किए जाने के मुद्दे पर कहा कि पुराने लीज रद्द कर दिए गए हैं. अब इस मामले में रेलवे का आरएलडीए ही कोई निर्णय ले सकता है. यदि वो भविष्य में कोई व्यवसायिक प्रोजेक्ट तैयार करता है तो इसका लाभ उन्हें मिल सकता है, लेकिन इसके लिए विस्थापितों को पहल करनी पड़ेगी.

(धनबाद से अभिषेक कुमार की रिपोर्ट)

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First published: February 15, 2020, 1:41 PM IST
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