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व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहा छात्रों का रूझान, संस्थान टटोल रहे संसाधन

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहा छात्रों का रूझान, संस्थान टटोल रहे संसाधन

एडमिशन को लेकर खूंटी के स्कूल-कॉलेज के कैंपस की हवा बदली नजर आ रही है. साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के परंपरागत कोर्स की बजाय छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रूझान दिखा रहे हैं.

एडमिशन को लेकर खूंटी के स्कूल-कॉलेज के कैंपस की हवा बदली नजर आ रही है. साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के परंपरागत कोर्स की बजाय छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रूझान दिखा रहे हैं.

एडमिशन को लेकर खूंटी के स्कूल-कॉलेज के कैंपस की हवा बदली नजर आ रही है. साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के परंपरागत कोर्स की बजाय छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रूझान दिखा रहे हैं.

    एडमिशन को लेकर खूंटी के स्कूल-कॉलेज के कैंपस की हवा बदली नजर आ रही है. साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के परंपरागत कोर्स की बजाय छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रूझान दिखा रहे हैं.

    अब तक पुराने पैटर्न पर चल रहे सरकारी शिक्षण संस्थान छात्रों के बदले रूझान को परख रहे हैं. साथ ही, थोड़ा है, थोड़े की जरुरत है कि तर्ज पर अपने संसाधन को भी टटोल रहे हैं.

    गौरतलब है कि खूंटी के विभिन्न इंटर कॉलेज और हाईस्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को कुछ साल पहले शुरू किया गया था, इस वर्ष से शिक्षा विभाग अन्य जिलों के साथ ही खूंटी के 11वीं के छात्रों को भी कंप्यूटर साइंस का पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने की तैयारी में है.

    जिला शिक्षा अधीक्षक मिथिलेश कुमार सिन्हा कहते हैं कि शिक्षा विभाग ने इस वर्ष प्लस टू स्कूलों में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया है और खूंटी के छात्रों को मौजूदा सत्र से ही कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की सुविधा मिलेगी.

    उधर, जिला मुख्यालय के एसएस प्लस टू हाईस्कूल की प्राचार्या अनिमा तिर्की भी मानती हैं कि हाल के वर्षों में छात्रों का व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रूझान बढ़ा है और इस रुझान को देखते हुए प्रचार्या ने अभी चल रहे पॉलट्री, रेडियो-टेलीविजन टेक्नॉलाजी के अलावा शिक्षा विभाग को नर्सिंग, लैब टेक्निशियन आदि का कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है.

    बहरहाल, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को लेकर स्टूडेंट और स्कूल प्रबंधन, दोनों में उत्साह है, लेकिन सवाल यह है कि छात्रों के सपनों पर संसाधनों की कमी की मार तो नहीं पड़ेगी? जिले के सरकारी शिक्षण संस्थान अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, इन संस्थानों में आधारभूत संसाधन भी मौजूद नहीं हैं. प्राचार्या अनिमा तिर्की भी मानती हैं कि हमारे पास जरूरी संसाधनों का अभाव है, ऐसे में इन तकनीकी पाठ्यक्रमों को अपनाना छात्रों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

    कैरियर के आकाश में उड़ान भरने की ख्वाहिश रखने वाले हमारे नौनिहाल संसाधनों की मार से कहीं पिछड़ न जाएं, अभिभावकों की यह चिंता लाजिमी है. ऐसे में शिक्षा विभाग थोड़ा सा भी ध्यान स्कूल-कॉलेजों की ओर दे तो कौशल विकास की दिशा में यह क्रांतिकारी कदम हो सकता है.

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