श्रमिक संगठनों के दो दिवसीय देशव्यापी बंद का धनबाद में मिला-जुला असर

मजदूर संगठनों की हड़ताल से कोयलांचल धनबाद रहा प्रभावित
मजदूर संगठनों की हड़ताल से कोयलांचल धनबाद रहा प्रभावित

कोयला क्षेत्र में निजीकरण सहित केंद्र सरकार नीतियों के विरोध में आहूत देश व्यापी हड़ताल में करीब 20 करोड़ कर्मचारी शामिल हैं. इनमें कोयला क्षेत्र के करीब 60 हजार कर्मचारी भी हैं. दूसरी ओर धनबाद बीसीसीएल के कुसुंडा एरिया मे हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा.

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केंद्रीय श्रमिक संगठनों के मंगलवार से दो दिवसीय देश व्यापी बंद का कोयलांचल धनबाद में मिला जुला असर पड़ा. जहां बीसीसीएल के 12 कोलियरी क्षेत्रों में से आधा दर्जन में कोल उत्पादन और डिसपैच प्रभावित हुई. बीएमएस को छोड़ कर इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस सहित अन्य मजदूर संगठन हड़ताल में शामिल हैं. श्रम कानून में संसोधन, कोयला क्षेत्र में निजीकरण सहित केंद्र सरकार नीतियों के विरोध में आहूत देश व्यापी हड़ताल में करीब  20 करोड़ कर्मचारी शामिल हैं. इनमें कोयला क्षेत्र के करीब 60 हजार कर्मचारी भी हैं.

दूसरी ओर धनबाद बीसीसीएल के कुसुंडा एरिया में हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा. वहीं बीसीसीएल भूमिगत खदानों मे कोयला खनन जारी है. इधर ट्रेड यूनियन नेताओं का आरोप है कि बीसीसीएल में आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है जबकि कोल इंडिया में मेडिकल अनफिट नियोजन पिछले कई वर्षो से  बंद है. फीमेल वीआरएस के तहत सैकड़ों लाभूकों को नियोजन से वंचित कर रखा गया.

मजदूर संगठनों का आरोप है कि देश कि सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को पूंजी पतियों के हाथों बेचा जा रहा है. एक तरफ बीएमएस ने दूसरे ट्रेड यूनियन पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इस हड़ताल को असफल करार दिया है. दूसरी ओर इंटक नेता सह पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक भी स्वीकार कर रहे हैं आज पहले दिन करीब 50 फीसदी कार्य प्रभावित हुआ है. कुल मिलाकर हड़ताल का कोयला उद्योग में मिला जुला असर पड़ा है.



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